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गोवर्धनपुर में शिक्षा व्यवस्था चरमराई, शिक्षक पद खाली

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गोवर्धनपुर संकुल केंद्र से संकुल समन्वयक को पदमुक्त करने के लिए दिया गया आवेदन, प्रतापपुर विकासखंड में शिक्षा का बुरा हाल, बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा है खिलवाड़

सूरजपुर। प्रतापपुर विकासखंड में इन दोनों शिक्षा का बहुत ही बुरा हाल हो गया है। कहना चाहिए कि शिक्षक विहीन स्कूल हो जाने के कारण आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्कूल है जहां बच्चे हैं वहां शिक्षक नहीं होने के कारण, बच्चे पढ़ने को तरस जा रहे हैं

यही हाल ग्राम पंचायत गोवर्धनपुर से एक मामला सामने आया है जिसमें एक शिक्षक को संकुल समन्वयक पद पर नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताया गया है। सचिन वर्मा ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंप कर बताया कि प्रा ०शा० गोवर्धनपुर में कुल 64 छात्र छात्राएं अध्ययन रत हैं,और वहां केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं जिसमें से एक शिक्षक चेतमन राम पडवार को संकुल समन्वयक नियुक्त किया गया है। और दूसरे प्रधान पाठक विनोद रजक का गत वर्ष में दुर्घटना हो जाने से पैर टूट गया है। जिस कारण वह अधिकतम स्कूल से नदारत रहते हैं। और वर्तमान में भी मेडिकल अवकाश में हैं। जबकि समन्वयक पद पर नियुक्ति के नियमावली में कंडिका क्रमांक 6 में स्पष्ट उल्लेख है कि जहां पर एकल या द्वि शिक्षक पदस्थ हैं वहां से संकुल समन्वयक का नियुक्ति न किया जावे।इसके बावजूद भी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए इस प्रकार का निर्णय लिया गया है ।जिससे शिक्षा समिति, पालक तथा ग्रामवासियों ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताया है। तथा आवेदन में रामविकास पटेल, मोहरलाल पटेल,शिक्षा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पूनमदेव पाण्डेय,उपसरपंच , राहुल वर्मा, संगम कुमार,विश्वजीत पटेल,उदय वर्मा शिवलाल सिंह, आनंद पटेल,एवं सैकड़ों ग्रामवासी तथा पलकों ने हस्ताक्षर करते हुए कहा है। आपत्ति जताई है और शिक्षा विभाग पर कड़े सवाल खड़े करते हुए मनमानी करने का आरोपलगाए हैं। जिला स्तर पर बैठे अधिकारियों ने अगर इसको संज्ञान में लेकर समन्वयक पद से पडवार को पृथक नहीं किया तो इसका परिणाम बच्चों के भविष्य पर बहुत बुरा पड़ेगा। और बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। इसलिए शासन प्रशासन से सभी ने निवेदन किया है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए तत्काल शिक्षक पडवार को संकुल समन्वयक पद से मुक्त किया जाए और किसी अन्य स्कूल से संकुल समन्वयक पद का नियुक्ति किया जाए ताकि बच्चों का पढ़ाई प्रभावित न हो। आवेदन का प्रतिलिपि कलेक्ट सूरजपुर,जिला शिक्षा अधिकारी,जिला मिशन समन्वयक, विo खo शिक्षा अधिकारी,एवं BRC को भेजा गया है,छात्र हित में अधिकारी अपना कदम बढ़ाएंगे या फिर लीपापोती करके मामले को दबाया जाएगा ये देखने लायक होगा। जहां इस तरह का अव्यवस्था के बीच में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे अधिकारी अपने मनमाने ढंग और राजनीति वा लेनदेन ऊंची पकड़ होने के कारण स्कूलों में पदस्थ होने के बावजूद भी बच्चों को पढ़ने में रुचि न लेते हुए। पद पर बैठना पसंद करते हैं।

अब बात यह है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में शिक्षा का लगातार गिरता स्तर और शासन प्रशासन एवं शिक्षा विभाग पर उठ रहे प्रश्न चिन्ह पर कसावट कबआखिर कसी जाएगी,

एक प्रकार से यदि देखा जाए तो शिक्षक विहीन स्कूल और छात्र-छात्राएं स्कूल में जाकर बिना पढ़ाई लिखाई किए ही घर लौट जा रहे हैं। स्कूल का ताला भी खुलता है या नहीं खुलता है यह भी भगवान मालिक है ग्रामीणों ने बताया कि कभी-कभार अगर स्कूल का ताला खुल भी गया तो मनमाने ढंग से स्कूल को बंद भी कर दिया जाता है।

लगातार शिक्षा का गिरता स्तर, और अधिकारियों के द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण इस तरह का गोरख धंधा चल रहा है बताया जाता है कि इस तरह का गोरख धंधा सैकड़ो विद्यालय में होता है। जहां शिक्षकों की वेतन बनती है वहीं जांच के नाम से हजारों रुपए हर महीना वसूली भी किया जाता है। जिस कारण से ब्लॉक मुख्यालय में बैठे हुए अधिकारी शिक्षा विभाग के कुर्सी को भी शर्मसार कर रहे हैं और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जिसका किसी प्रकार से जांच कार्यवाही नहीं होना राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होता है। ऐसे में गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ शासन की योजना गर्त में जाते दिखाई दे रही है। जो अधिकारी कुर्सी में बैठकर मलाई खा रहे हैं। जिससे आम जनता और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। और 7 वर्षों से कुर्सी पर अंगद की तरह पैर जमाए बैठे, विकासखंड अधिकारी शिक्षा अधिकारी, हमेशा विवादों के सुर्खियों में रहते हैं।

गोवर्धनपुर में शिक्षा व्यवस्था चरमराई, शिक्षक पद खाली

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