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मध्याह्न भोजन स्कूल में नहीं घर में खाने गए बच्चे, प्रधान पाठक की लापरवाही हुई उजागर

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केले के टुकड़े देकर बच्चों के पेट भरने की गई कोशिश

सूरजपुर – प्रदेश के सभी स्कूली बच्चों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था मिल सके इसके लिए शासन का स्कूल शिक्षा विभाग हमेशा कोई न कोई नवाचार करती है। इसी क्रम में बच्चों की उपस्थिति को बढ़ाने, तथा भूख और कुपोषण से बचाने हेतु विद्यालयों में मध्याह्न भोजन दिया जाता है। लेकिन इस व्यवस्था को ठेंगा दिखाने में जिम्मेदार शिक्षक कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

दअरसल पूरा मामला रामानुजनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अगस्तपुर के झालरपारा में बने शासकीय प्राथमिक विद्यालय का है। जहां बीते दिनों स्कूल के सभी बच्चे दोपहर का भोजन करने अपने अपने घर गए थे। प्रधानपाठक के इस लापरवाही पर जहां एक ओर पालकों में नाराजगी है तो वहीं दूसरी ओर बच्चों ने भी प्रधानपाठक पर यह आरोप लगाते हुए बताया कि प्रधानपाठक ने एक केले के दो दो टुकड़े करके सभी बच्चों में बांटा है।

वहीं गांव के कुछ लोगों का आरोप है कि प्रधानपाठक नशा भी करते हैं और विद्यालय में कभी – कभी बच्चों से ही साफ – सफाई करवाते हैं।।

बता दें कि इस प्राथमिक विद्यालय में एक महिला शिक्षक को मिलाकर कुल दो शिक्षक पदस्थ हैं इसके बावजूद अगर सभी स्कूली बच्चे मध्याह्न भोजन करने घर जाने को मजबूर हैं तो निश्चित ही ये व्यवस्था घोर लापरवाही कही जा सकती है।

पत्रकारों के सवाल पर प्रधानपाठक ने बताया कि रसोइया का तबियत खराब है। जिसके न आने से गड़बड़ी हुई है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चों को दोपहर का भोजन लेने के लिए उन्हें घर जाने की अनुमति आखिर दी किसने ? शिक्षकों द्वारा बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर जो उन्हें घर भेजने की एक नई परंपरा की शुरुआत की गई है इससे पालकों में रोष व्याप्त है।

अब देखना यह कि ये खबर चलने के बाद विभागीय अधिकारी इस मामले पर कोई उचित कार्यवाही करते हैं या फिर नहीं।

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