प्रतापपुर स्वास्थ्य केंद्र से सुर्खियों में रहने वाले कोडाकू मरीज गायब – अस्पताल की कार्य प्रणाली पर उठ रहे सवाल
जाहिद अंसारी संवाददाता
सूरजपुर /प्रतापपुर :– स्वास्थ्य सुविधा की बदहाली पर कल जो तस्वीरें और खबरें सामने आई थीं, उसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी थी। ग्राम गोरगी निवासी नान राम कोडाकू को परिजनों ने एंबुलेंस न मिलने पर झलगी में कई किलोमीटर तक झेलगी में ढोकर प्रतापपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया था। उस अमानवीय दृश्य ने शासन-प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया था।
लेकिन अब इस घटना ने एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। बताया जा रहा है कि आज सुबह करीब 9 बजे बिना किसी सूचना दिए मरीज के परिजन अस्पताल से उसे लेकर भाग गए। इस तरह अचानक मरीज को अस्पताल से बाहर ले जाना, वह भी कोडाकू जैसी विलुप्तप्राय जनजाति के मामले में, गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
इलाज और देखरेख पर सवाल :
सूत्रों के अनुसार, परिजनों का आरोप है कि मरीज को अस्पताल में न तो उचित इलाज मिल रहा था और न ही सही देखरेख। इसी वजह से उन्होंने मजबूरी में उसे अस्पताल से हटा लिया। सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि “अगर अस्पताल में ही सही इलाज न मिले तो आखिर गरीब आदिवासी कहाँ जाए?”
विभाग और प्रशासन में हड़कंप
मरीज के अचानक गायब होने की खबर मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। मामले की पुष्टि करते हुए एसडीएम ने गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों ने माना कि यह गंभीर लापरवाही है और इसकी तह तक जाकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।
मानवता पर कलंक
कल जिस तरह परिजनों ने झलगी में बीमार मरीज को ढोकर लाने का दिल दहला देने वाला दृश्य पेश किया था, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था। और अब अस्पताल की अव्यवस्था ने उस जख्म पर नमक छिड़कने का काम किया है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अस्पताल में इलाज की स्थिति देखकर ही परिजनों ने हार मान ली और अपने स्तर पर मरीज को कहीं और ले जाने का फैसला किया।
इस पूरे घटनाक्रम ने ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का दिया है। लोग पूछ रहे हैं – “जब 21वीं सदी में भी इंसान को झलगी में ढोना पड़े और अस्पताल से मरीज खुद ही भाग जाए, तो फिर स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर सरकार किन दावों की दुहाई दे रही है?”
इस घटना ने न सिर्फ प्रतापपुर बल्कि पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या सख्त कदम उठाता है या फिर मामला हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
इस विषय में एसडीएम ललिता भगत ने बताया कि सूरजपुर कलेक्टर के दिशा निर्देश पर मामला के गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रतापपुर स्वास्थ्य केंद्र में एडमिट कोडाकू जाति के ग्रामीणों को देखने के लिए एवं सही उपचार के लिए दिशा निर्देश देने एवं अच्छा से अच्छा इलाज हुई इसके लिए मैं गई थी मगर वहां जाकर पता चला कि वह लोग बिना बताए शायद जाड़ फूंक कराने के चक्कर में अस्पताल से सुबह चले गए जिसकी खबर किसी को भी नहीं लगी एसडीएम ने कहा इस मामले पर अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई और लापरवाही वा सही देखरेख नहीं होने के कारण इस तरह का लापरवाही सामने आया है जिसकी जानकारी कलेक्टर को भी अवगत करा दिया गया है और किसकी किसकी ड्यूटी थी यह जानकारी ली जा रही है इतना बड़ा गंभीर मामला होने के बाद अस्पताल प्रबंधन के द्वारा लापरवाही बरतना बिल्कुल गलत है। एसडीएम ने बताया कि उक्त लोगों को काफी खोजबीन कराया गया अंतिम लोकेशन उनका बस स्टैंड की ओर मिला, साफ तौर पर जाहिर है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतापपुर की लापरवाही लापरवाही हुई है।
इस विषय में सीएमओ जिला चिकित्सालय अधिकारी कपिल पैकरा ने कहा कि अब तो बिल्कुल हद हो गई इलाज के लिए ले गए कोडाकू जनजाति के लोगों को सही उपचार भर्ती कर जानकारी देनी थी मगर ऐसी क्या बात हुई जिसके वजह से वह अस्पताल से बिना बताए सुबह चले गए किसका किसका ड्यूटी है क्या इलाज हुआ जांच करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी