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सफलता की कहानी: तक्षशिला मेधा परिसर, जिला ग्रंथालय सूरजपुर

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(डी.एम.एफ. योजना अंतर्गत स्थापित तथा जिला प्रशासन सूरजपुर एवं शिक्षा विभाग सूरजपुर द्वारा संचालित)

सूरजपुर। “ज्ञान ही सफलता की कुंजी है” – इस विचार को साकार कर रहा है तक्षशिला मेधा परिसर । तक्षशिला मेधा परिसर, जिला ग्रंथालय सूरजपुर आज विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों और शोधार्थियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुका है। यह केवल एक लाइब्रेरी नहीं, बल्कि “सफलता की सीढ़ी” के रूप में देखा जा रहा है। जहाँ से अनेक विद्यार्थी अपने सपनों के साथ अध्ययन कर रहे हैं।

1. परिचय

यह अध्ययन केंद्र विद्यार्थियों, पाठकों और शोधार्थियों को उत्कृष्ट अध्ययन का वातावरण प्रदान करता है। यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु समृद्ध संसाधन, मार्गदर्शन और शांत अध्ययन माहौल उपलब्ध है।

2. स्थापना एवं इतिहास

12 फरवरी 2022 को सूरजपुर जिला प्रशासन द्वारा स्थापित यह ग्रंथालय दो मंजिला आधुनिक भवन में संचालित है।

यहाँ 18,000 से अधिक पुस्तकों का सुव्यवस्थित संग्रह है कृ जिसमें सामान्य अध्ययन, विज्ञान, इतिहास, सीजीपीएससी , व्यापम, यूपीएससी, रेलवे, बैंकिंग, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित साहित्य उपलब्ध है।

3. सदस्यता और वर्तमान स्थिति

तक्षशिला मेधा परिसर की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है –

कुल रजिस्टर्ड सदस्यरू 518

अब तक जारी पुस्तकेंरू 5000$

कुल विज़िट्सरू 15,000$

प्रतिदिन 50 से 80 पाठक नियमित अध्ययन हेतु आते हैं।कई विद्यार्थियों का चयन विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलतापूर्वक हुआ है

 4. प्रमुख सुविधाएँ

वाईफाई कैंपस और ऑनलाइन लर्निंग सुविधा

कंप्यूटर लैब दृ डिजिटल शिक्षा के लिए

सीजीपीएससी, यूपीएससी, व्यापम, एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें।150-200 पाठकों के लिए आरामदायक अध्ययन व्यवस्था। शोधार्थियों और वरिष्ठ नागरिकों हेतु विशेष कक्ष। सुव्यवस्थित, श्रेणीबद्ध और आधुनिक पुस्तक प्रबंधन प्रणाली

5. विशेषताएँ

विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अध्ययन और शोध की उत्कृष्ट सुविधाएँ

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क मार्गदर्शन और अध्ययन सामग्री

पुस्तक सुझाव सेवा – विद्यार्थियों की रुचि के अनुसार पुस्तक उपलब्धता

डिजिटल और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अध्ययन की सुविधा

6. सफलता की दिशा में

तक्षशिला मेधा परिसर ने सूरजपुर जिले के सैकड़ों युवाओं के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कई विद्यार्थी जिन्होंने सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई शुरू की थी, आज सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं।

यह लाइब्रेरी न केवल ज्ञान का भंडार है, बल्कि प्रेरणा और अवसरों का केंद्र भी है।

7. तक्षशिला मेधा परिसर, जिला ग्रंथालय सूरजपुर आज जिले के युवाओं के लिए एक “ज्ञान तीर्थ” बन चुका है।

यहाँ की सुविधाएँ, अनुशासित वातावरण और मार्गदर्शन विद्यार्थियों के अकादमिक व पेशेवर विकास में अमूल्य योगदान दे रहे हैं। यह केवल एक लाइब्रेरी नहीं – यह सूरजपुर की शिक्षा क्रांति का प्रतीक है।

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