सूरजपुर- बाल विवाह मुक्त भारत के लिए संचालित 100 दिवसीय सघन जागरूकता अभियान अंतर्गत जनपद पंयायत भवन सभा कक्ष ओड़गी एवं मंगल भवन ओडगी में दिनांक 26 दिसम्बर 2025 को ब्लाक स्तरीय जागरूकता/कार्यशाला का आयोजन सम्पन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्धेश्य बाल विवाह के प्रति लोगों जागरूक कारना एवं ग्रामिण स्तर गठित बाल विवाह रोकथाम समिति को एक्टीव करना था। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर एवं महिला बाल विकास विभाग सूरजपुर एवं जिला प्रशान के संयुक्त त्वाधान में आयोजित हुआ।
यह पूरा कार्यक्रम श्रीमती विनीता वार्नर, प्रधान जिला न्यायाधीश / अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर के मार्गदशन एवं सचिव सुश्री पायल टोपनो के निर्देशन में आयोजित हुआ।
इस विशेष कार्यक्रम कि अध्यक्षता श्री मनोज जायसवाल, जिला बाल संरक्षण अधिकारी सूरजपुर, श्री जगेश्वर साहू, परियोजना अधिकारी ओड़गी एवं पीएलव्ही सत्य नारायण ने की। इस कार्यक्रम में ओड़गी ब्लाक के समस्त सरपंच, सचिव, चिन्हांकित पंच एवं अजिविका मिशन के अंतर्गत कार्यरत समूह कि महिलाएं शामिल रहीं ।
श्री मनोज जायसवाल ने इस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा की महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रालय द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत के लिए 100 दिवसीय सघन जागरूकता अभियान की शुरूवात की गई है जिसका उद्देश्य बाल विवाह को जिले से पूर्ण रूप से समाप्त कर बाल विवाह भारत बनाना है।
उन्होने पंचायत स्तर पर गठित बाल विवाह रोकथाम समिति के कार्य एवं समिति के दायित्वों को याद दिलाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में सूरजपुर जिला में बाल विवाह का प्रतिशत ज्यादा रहता है जिसे रोकना हम सब की साझा जिम्मेदारी है। उन्होने यह भी बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के दिशानिर्देशन में जिला स्तर पर आशा युनिट के नाम से समिति का गठन किया गया है जिसके अध्यक्ष प्रधान जिला न्यायधीश हैं एवं जिला के अन्य जिला अधिकारी इस समिति के सदस्य है। उन्होने बताया कि
(आशा-जागरूकता, समर्थन, सहायता और कार्यवाही) मानक संचालन प्रक्रिया पर कार्य कर रही है, इस समिति का उद्धेश्य भी बाल विवाह रोकने, बाल विवाह हो जाये तो पीड़िता को सहायता उपलब्ध कराने और दोषियों पर कार्यवाही करना है। इसके अतिरिक्त उन्होने बाल विवाह होने से बच्ची के जीवन में पड़ने वाले बुरे प्रभावों, बाल विवाह रोकने के उपाय तथा बाल विवाह हो जाने कि स्थिति में विधि द्वारा निर्धारित दण्ड के प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा करते हुए टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम एवं पॉक्सो एक्ट एवं टोल फ्री नं0 1098 की सेवाओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
पीएलव्ही श्री सत्य नारायण ने अपने उद्धबोधन में बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता एवं सलाह प्रदान करने पर काम करती है, ताकि आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गरीब और जरूरमंद लोगों को प्रकरण की पैरवी, प्रकरण पेश करने हेतु वकील, कोर्ट फीस और अन्य कानूनी खर्चो से मुक्ति दिलाता है, ताकि सभी को न्याय कि लडाई में समान अवसर मिल सके। उन्होने उन्होने यह भी बताया कि यह सेवा सिर्फ जिले तक सिमित नही है यह तालुका न्यायालय, जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालयत तक सेवा प्रदान करती है, तालुका न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय तक प्राधिकरण कार्यलय स्थापित हैं, जहां किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह या सहायता के लिए आप आन लाईन नालसा की वेबसाईट, नालसा की टोल फ्री नं.15100 के माध्यम से या कार्यालय में उपस्थित होकर सहायता प्राप्त किया जा सकता है ।
श्रीमती चंदा सिंह, काउंसलर ने अपने उद्धबोधन में सखी वन स्टाफ सेन्टर के माध्यम से मिलने वाली सेवाओं के संबंध में वितृत जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा को सहना हिंसा को बढावा देना है। हो रहे हिंसा के खिलाफ हर महिला को आगे आना होगा तभी समाज से घरेलू हिंसा को समाप्त किया जा सकता है। उन्होने महिला हिंसा रोकने एवं सखी सेन्टर में सिकायत दर्ज करने हेतु संचालित टोल फ्री नं. 181 के बारे में जानकारी देते हुए अपील किया की किसी प्रकार की हिंसा हो रही है तो टोल फ्री नम्बर पर या सखी सेन्टर सूरजपुर में आकर सिकायत करें घरेलु हिंसा को जितना छुपाएंगे हिंसा उतना बढ़ता जायेगा।


















