अवैध उत्खनन और भ्रष्टाचार का आरोप; कार्रवाई न होने पर शिवसेना ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
सूरजपुर- जिला मुख्यालय सूरजपुर से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम देवीपुर में शिक्षा के मंदिर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यहाँ स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के बच्चों के जीवन के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर शिवसेना (उद्धव बाला साहेब) की सूरजपुर इकाई ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार, 05 जनवरी 2026 को शिवसेना पदाधिकारियों ने माननीय कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अवैध कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
स्कूल परिसर में मौत का साया
शिवसेना के जिला अध्यक्ष विष्णु वैष्णव ने बताया कि विद्यालय के खुले ग्राउंड परिसर में ही विद्युत ट्रांसफार्मर स्थापित है, जो किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। छोटे-छोटे बच्चे इसी मैदान में खेलते हैं, जिससे उनके जीवन पर निरंतर खतरा बना रहता है। यह प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है।
क्रेशर प्लांट और प्रदूषण की मार
शिकायत पत्र के अनुसार, विद्यालय से मात्र 200 मीटर की दूरी पर दर्जनों गिट्टी क्रेशर प्लांट नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे हैं। इन प्लांटों से उड़ने वाली घातक धूल और शोर ने पूरे विद्यालय क्षेत्र को ‘जहरीले वातावरण’ में तब्दील कर दिया है। इसके कारण स्कूली बच्चों और ग्रामीणों में दमा, सांस की बीमारी, आँखों में जलन और त्वचा रोग जैसी गंभीर समस्याएँ बढ़ रही हैं।
भ्रष्टाचार और अवैध उत्खनन के आरोप
शिवसेना ने आरोप लगाया है कि केतका जंगल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन कराया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है। आरोप है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों के संरक्षण में बिना वैध दस्तावेजों और प्रदूषण बोर्ड की अनुमति के क्रेशर प्लांट चल रहे हैं।
शिवसेना की प्रमुख मांगें:
स्कूल परिसर से ट्रांसफार्मर को तत्काल हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाए।
विद्यालय के 500 मीटर के दायरे में संचालित सभी गिट्टी क्रेशर प्लांटों की संयुक्त जांच हो।
केतका जंगल में हुए अवैध उत्खनन की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
बच्चों और ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए विशेष जांच शिविर लगाया जाए।
जिलाध्यक्ष विष्णु वैष्णव, ग्रामीण जिलाध्यक्ष हेमंत कुमार महंत और ब्लॉक अध्यक्ष मोहन टेकाम ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो शिवसेना जन आंदोलन के लिए विवश होगी।



















