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सूरजपुर कलेक्टर की संवेदनशीलता: दिव्यांग महिला को गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे जनप्रतिनिधि

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सभापति के पहल से दिव्यांग महिला सुमारी बाई को मिली ट्राइसाइकिल

सूरजपुर- जिले में मानवता और त्वरित प्रशासनिक कार्यवाही का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है। जिला कलेक्टर की संवेदनशीलता से एक अत्यंत निर्धन दिव्यांग महिला को न केवल नई पहचान मिली, बल्कि उनके जीवन की राह भी आसान हो गई है।

बेबस थी जिंदगी, घिसटकर चलने को थी मजबूर

मामला भैयाथान विकासखंड के ग्राम पंचायत गंगौटी का है। यहाँ की निवासी 50 वर्षीय सुमारी बाई लंबे समय से गंभीर शारीरिक दिव्यांगता का दंश झेल रही थीं। उनकी स्थिति इतनी दयनीय थी कि वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ थीं और मजबूरी में जमीन पर घिसटकर अपना जीवन काट रही थीं। गरीबी का आलम यह था कि उन्हें मात्र 10 किग्रा राशन मिलता था, जो उनके भरण-पोषण के लिए नाकाफी था।

जनप्रतिनिधि ने पेश की मिसाल

सुमारी बाई की इस व्यथा को सहकारिता एवं उद्योग विकास विभाग के सभापति राजू कुमार गुप्ता ने महसूस किया। उन्होंने न केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कीं, बल्कि मानवता की मिसाल पेश करते हुए दिव्यांग महिला को अपने गाड़ी में बैठाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे उसके बाद अपनी गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट के अंदर ले कर गए। उन्होंने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया कि महिला की दिव्यांगता प्रमाणपत्र में भले ही 65% दर्ज है, लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर है, इसलिए उन्हें सामान्य के बजाय इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसिकल की आवश्यकता है।

कलेक्टर एस. जयवर्धन की त्वरित कार्यवाही

कलेक्टर एस. जयवर्धन ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने मौके पर ही समाज कल्याण विभाग और खाद्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया। कलेक्टर के कड़े निर्देशों का असर यह हुआ कि तत्काल सुमारी बाई को ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई।

सहयोग पाकर छलकीं आंखें

प्रशासन से मिले इस त्वरित सहयोग के बाद सुमारी बाई ने भावुक होकर कलेक्टर और सभापति का धन्यवाद ज्ञापित किया। अब वह ट्राइसाइकिल के माध्यम से अपनी दैनिक आवश्यकताओं जैसे बाजार और अस्पताल जाने के लिए आत्मनिर्भर हो सकेंगी। क्षेत्र में जिला प्रशासन की इस कार्यशैली और संवेदनशीलता की जमकर प्रशंसा हो रही है।

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