सूरजपुर – बीते रविवार को पेश हुए केन्द्रीय बजट को लेकर जिले की राजनीति में गरमाहट आ गई है। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में जैसे ही 9 वाँ केंद्रीय बजट पेश किया वैसे देश राजनैतिक गलियारों में अनगिनत चर्चाएं होने लगी। किसी ने इस बजट को विकास का बजट बताया तो किसी ने जन सारोकार से परे का बजट बताया।
इसी क्रम में प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सह संयुक्त महामंत्री अनुपम फिलिप ने केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने देश के बजट के नाम पर कॉर्पोरेट घरानों का बजट पेश किया है। पूरा बजट केवल इस बिंदु पर केंद्रित है कि किस तरह बड़े उद्योगपतियों के हाथों में दुर्लभ खनिज और अनमोल प्रकृति संसाधनों को सौंप दिया जाए। जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने बेरोजगारों का नामकरण आकांक्षी युवा किया है।
शिक्षित युवाओं के लिए सीधे रोजगार की कोई योजना नहीं है न ही बेरोजगारी भत्ते की बात है। यह बजट प्रधानमंत्री के झूठे वायदों और लुभावने भाषण का दोहराव है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य की वन संपदा का अंधाधुंध दोहन करने के बाद भी छत्तीसगढ़ की घोर उपेक्षा की गयी है। केंद्र की नज़र में छत्तीसगढ़ किसी करारोपण संस्था से ज़्यादा नहीं है।
आमजनता केंद्र सरकार से महंगाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, जीविकोपार्जन जैसे मुद्दों पर ठोस उपायों की उम्मीद करती है। इस बार भी बहुजन समाज को छला गया है। कृषि क्षेत्र में कम आवंटन से किसान निराश है। दूसरी तरफ़ पूंजीगत व्यय में रिकॉर्ड गिरावट से छोटे-मंझोले उद्योग दम तोड़ देंगे। टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बार बार गिरते शेयर बाजार से भारतीय निवेशकों के करोड़ो डॉलर डूब गए है। इसके बावजूद शेयर बाजार में टैक्स का भार घटाया नहीं गया है। इस बजट में महिलाओं और अंत्योदय वर्ग के लिए कुछ भी नया नहीं है। कुलमिलाकर केंद्रीय बजट कॉर्पोरेट बजट बनकर रह गया है। इसका कोई फायदा आमजन को नहीं होगा ।


















