पेंशन में गिरावट एवं विश्रामपुर की अनदेखी पर जताई चिंता
रेल स्टॉपेज, बेरोजगारी और बंद होती खदानों को लेकर सरकार तक आवाज़ पहुंचाने का ऐलान
सूरजपुर / बिश्रामपुर – श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत केंद्रीय सलाहकार ठेका श्रम बोर्ड (CACL Board) के अध्यक्ष एवं भारतीय मजदूर संघ के नव-नियुक्त राष्ट्रीय महामंत्री सुरेंद्र कुमार पाण्डेय का सम्मान होने के उपरांत विश्रामपुर स्थित भारतीय मजदूर संघ कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
इस अवसर पर जिले के अनेक वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे।
प्रेस वार्ता में पांडे ने पत्रकारों के तीखे सवालों का विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। कोल इंडिया के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की घटती पेंशन राशि पर पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि देश में तेजी से बढ़ रहे निजीकरण के कारण कोल इंडिया की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।
उन्होंने बताया कि निजी कंपनियां कम लागत में उत्पादन कर बाजार में सस्ता कोयला उपलब्ध कराती हैं, क्योंकि वे केवल निर्धारित मजदूरी देकर अन्य सुविधाएं नहीं देतीं। जबकि कोल इंडिया अपने कर्मचारियों को वेतन के साथ चिकित्सा, आवास, यात्रा सुविधा सहित कई सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और राजस्व में कमी के कारण पेंशन दरों में गिरावट देखी जा रही है।
बिश्रामपुर रेलवे की अनदेखी पर उठी आवाज
रेलवे विस्तार के मुद्दे पर श्री पांडे ने कहा कि विश्रामपुर कभी अंतिम स्टेशन के रूप में प्रसिद्ध था, जहां से कोयला परिवहन की शुरुआत हुई थी। किंतु अंबिकापुर में रेलवे स्टेशन बनने के बाद विश्रामपुर को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अंबिकापुर से दिल्ली के लिए चलने वाली साप्ताहिक ट्रेन का विश्रामपुर में स्टॉपेज नहीं है। इस संबंध में उन्होंने आश्वस्त किया कि रेल मंत्री से अपने अच्छे संबंधों के आधार पर वे शीघ्र ही औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे, ताकि विश्रामपुर में ट्रेन का ठहराव सुनिश्चित हो और ट्रेन की आवृत्ति भी बढ़ाई जा सके।
डिप्लोमा धारक युवाओं के रोजगार पर चर्चा
कोल माइंस से संबंधित डिप्लोमा कर चुके बेरोजगार युवाओं के सवाल पर श्री पांडे ने कहा कि आधुनिक तकनीक और मशीनों के बढ़ते उपयोग से पारंपरिक नौकरियों में कमी आई है। मशीनें कम समय में अधिक कार्य कर रही हैं, जिससे मानव संसाधन की आवश्यकता घट रही है।
फिर भी उन्होंने आश्वासन दिया कि युवाओं के हित में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखा जाएगा, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके।
बंद होती खदानें और मजदूर हितों की लड़ाई
निजीकरण और बंद होती खदानों के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारतीय मजदूर संघ मजदूरों के वेतन, भत्ता, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार संरक्षण को लेकर निरंतर संघर्षरत है। बस स्टैंड, सड़क और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही।
प्रेस वार्ता के अंत में श्री पांडे ने उपस्थित पत्रकारों को शॉल, पेन और डायरी भेंट कर आभार व्यक्त किया तथा सभी से आत्मीय मुलाकात की।
पत्रकारों ने मांगा स्थायी कार्यालय भवन
प्रेस वार्ता के समापन अवसर पर स्थानीय पत्रकारों ने सुरेंद्र कुमार पांडे से सामूहिक आग्रह किया कि विश्रामपुर क्षेत्र में पत्रकारों के लिए सर्व सुविधायुक्त एक स्थायी कार्यालय भवन की व्यवस्था की जाए l पत्रकारों के इस मांग पर श्री पाण्डेय ने सकारात्मक आश्वासन दिया है l इधर
पत्रकारों का कहना था कि वर्तमान में किसी स्थायी स्थान के अभाव में बैठक, आमसभा या सामाजिक मुद्दों पर सामूहिक विमर्श आयोजित करने में कठिनाई होती है। यदि एक निश्चित कार्यालय उपलब्ध हो, तो क्षेत्र के पीड़ित, वंचित और समस्याग्रस्त नागरिकों को अपनी बात रखने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। वे सीधे उस कार्यालय में पहुंचकर अपनी शिकायत या समस्या दर्ज करा सकेंगे।
पत्रकारों ने यह भी कहा कि एक स्थायी कार्यालय न केवल संवाद का केंद्र बनेगा, बल्कि सामाजिक निराकरण और जनहित मुद्दों पर सामूहिक निर्णय लेने का मंच भी सिद्ध होगा।
इस मांग पर श्री पांडे ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि वे गंभीरतापूर्वक प्रयास करेंगे कि पत्रकारों को एक कार्यालयनुमा भवन उपलब्ध कराया जाए, ताकि क्षेत्र में संवाद, सामाजिक समन्वय और जनसुनवाई की प्रक्रिया मजबूत हो सके।
इसी क्रम में चार नए श्रम कानूनों के विरोध में12 फरवरी को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को लेकर पूछे गए सवाल पर भारतीय मजदूर संघ (BMS) के राष्ट्रीय महामंत्री सुरेंद्र कुमार पांडे ने स्पष्ट किया कि बीएमएस इस हड़ताल में शामिल नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह नहीं है कि संगठन श्रमिक हितों के मुद्दों के विरुद्ध है, बल्कि बीएमएस की कार्यप्रणाली अन्य संगठनों से भिन्न है। हमारा उद्देश्य सदैव जनहित और मजदूर हितों की रक्षा करना है, किंतु हम पहले संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से समाधान तलाशने में विश्वास रखते हैं। यदि संवाद से निराकरण नहीं निकलता, तभी संघर्ष का मार्ग अपनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन अंतिम विकल्प होना चाहिए, प्राथमिकता हमेशा रचनात्मक वार्ता को दी जानी चाहिए।


















