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सरगुजा ओलंपिक 12 विधाओं में युवाओं ने दिखाई प्रतिभा, जूनियर वर्ग में 826 बालक व बालिका बने प्रतिभागी

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विधायक भूलन सिंह मरावी और जिला पंचायत सीईओ ने गोला फेंककर किया शुभारंभ, ‘स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन’ का दिया संदेश

सूरजपुर- छत्तीसगढ़ शासन खेल व युवा विभाग के निर्देशानुसार व कलेक्टर एस. जयवर्धन के मार्गदर्शन में आज जिले के शा.आ.बालक उ.मा.विद्यालय स्टेडियम ग्राउंड में जिला स्तरीय सरगुजा ओलंपिक का भव्य आयोजन किया गया। प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मराबी के मुख्य आतिथ्य में सरगुजा ओलंपिक जूनियर वर्ग कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर विधायक भूलन सिंह मराबी, भीमसेन अग्रवाल, मुरली मनोहर सोनी व जिला पंचायत सीईओ विजेंद्र सिंह पाटले ने गोला फेंक कर सरगुजा ओलंपिक खेल महाकुंभ की शुरुआत की और उपस्थित युवाओं का उत्साह वर्धन किया। इस खेल के महाकुंभ में जिले के समस्त विकासखंड से जूनियर वर्ग में 826 बालक व बालिकाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, शहर से लेकर ग्रामीण अंचल के प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ खेल का आनंद लिया और अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से दर्शकगण को अपनी ओर आकर्षित किया।

कार्यक्रम में उपस्थित भूलन सिंह मराबी ने उपस्थित खेल प्रतिभागियो को संबोधित करते हुए कहा कि खेल हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। खेलने से न केवल हमारा शरीर स्वस्थ और मज़बूत रहता है, बल्कि हमारा मन भी प्रसन्न और ऊर्जावान बना रहता है। खेल हमें अनुशासन सिखाता है, समय पर उठना, नियमों का पालन करना और टीम के साथ मिलकर काम करना। जब कोई बच्चा मैदान में गिरकर फिर से उठकर दौड़ता है, तो वह अनजाने में जीवन का सबसे बड़ा सबक सीख रहा होता है कि हार के बाद भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। खेल हमें सहनशीलता, धैर्य और आत्मविश्वास जैसे गुण देता है जो किताबों से मिलना मुश्किल है। आज के समय में जब बच्चे और युवा मोबाइल और टीवी में उलझे रहते हैं, तब खेलों का महत्व और भी बढ़ जाता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से खेलता है, वह शारीरिक रूप से तो चुस्त रहता ही है, साथ ही मानसिक रूप से भी मज़बूत होता है। इसीलिए कहा गया है, ’’स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास होता है।’’ हमें अपने दैनिक जीवन में खेलों को उतना ही महत्व देना चाहिए जितना पढ़ाई-लिखाई को, क्योंकि खेल और शिक्षा मिलकर ही एक संपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। इसके साथ सभी प्रतिभागियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

जिला पंचायत सीईओ विजेंद्र सिंह पाटेल ने उपस्थितजनों से कहा कि खेल चरित्र गढ़ने की सबसे अच्छी पाठशाला है। मैदान में जब कोई खिलाड़ी हारता है तो वह सीखता है कि हार को गरिमा के साथ कैसे स्वीकार करें। जब जीतता है तो समझता है कि घमंड नहीं करना चाहिए। टीम में खेलते हुए वह सीखता है कि अकेले नहीं, मिलकर आगे बढ़ना होता है। खेल हमें ईमानदारी सिखाता है। नियमों के भीतर रहकर अपना सर्वश्रेष्ठ देना। जो बच्चा बचपन से खेल के मैदान में उतरता है, वह बड़ा होकर जीवन की हर चुनौती को खेल भावना से लेता है। उसमें धैर्य होता है, साहस होता है और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव होता है। सच में कहें तो खेल वह गुरु है जो बिना कुछ कहे बहुत कुछ सिखा देता है। अंत में उन्होने प्रतिभागियों को अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की बात कही और उन्हे शुभकामनाएं दी।

आज की प्रतियोगिता जूनियर वर्ग के लिए थी। जिसमें 14 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाएं प्रतिभागी रही, वहीं कल 13 फरवरी को जिला स्तरीय सरगुजा ओलंपिक समापन दिवस पर सीनियर वर्ग अंतर्गत 17 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के महिला व पुरुष प्रतिभागी रहेगें। 12 विभिन्न खेल विधाओं में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, कुश्ती, कराते, कबड्डी, खो-खो, व्हॉलीबॉल, बास्केटबॉल व रस्साकस्सी इत्यादि खेल शामिल हैं। आज मैदान स्थल में प्रतिभागियों ने 100 मी., 200 मी., 400 मी. दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद शॉटपूट डिस्कस थ्रो, जैवलीन थ्रो, रिलेरेस, तीरंदाजी, बैंडमिंटन (सिंगल-डबल), खो-खो, बॉलीवाल, बास्केटबॉल जैसे खेलों मे उत्कृष्ठ प्रदर्शन किया और दर्शको के मन मे अपना स्थान बनाया। अंतिम में प्रतियोगिताओं में प्रतिभागी रहें विजेताओं को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार राशि व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में दर्शकगण, जनप्रतिनिधिगण, खेल अधिकारी आरती पाण्डेय व अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

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