वरिष्ठों की उपेक्षा और ‘अपनों’ को पद बांटने का आरोप, उपाध्यक्ष, महामंत्री और सचिवों ने शशि सिंह को भेजा सामूहिक इस्तीफा
सूरजपुर- जिला कांग्रेस कमेटी में मचे घमासान ने संगठन की अंदरूनी कलह को सतह पर ला दिया है। जिला अध्यक्ष शशि सिंह द्वारा हाल ही में घोषित की गई जिला कार्यकारिणी के गठन के विरोध में पार्टी के कई समर्पित और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एक साथ अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है। पदाधिकारियों का आरोप है कि संगठन के लिए वर्षों से पसीना बहाने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ऐसे चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है जो कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य तक नहीं हैं।
इस्तीफों का मुख्य कारण: ‘आयातित’ चेहरों पर नाराजगी
इस्तीफा देने वाले नेताओं ने जिला अध्यक्ष को भेजे अपने पत्रों में गंभीर आरोप लगाए हैं:
अनुभवहीनता: नई कार्यकारिणी में ऐसे अनुभवहीन चेहरों को शामिल किया गया है, जिनकी पार्टी में कोई सक्रिय भूमिका नहीं रही है।
कांग्रेस विरोधियों को तवज्जो: आरोप है कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के विरुद्ध कार्य करने वाले लोगों को जिला संगठन में सीधे महत्वपूर्ण पदों पर बैठा दिया गया है।
रायशुमारी का अभाव: वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि जिले के प्रमुख वरिष्ठजनों से बिना किसी सलाह-मशविरे के यह कार्यकारिणी थोपी गई है।
इन प्रमुख पदाधिकारियों ने छोड़ा पद
इस्तीफा देने वालों में जिले के कई बड़े नाम शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व (मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और दीपक बैज) को भी अपनी व्यथा भेजी है:
उषा सिंह: जिला उपाध्यक्ष (स्वास्थ्य कारणों और संगठन की स्थिति का हवाला देते हुए इस्तीफा)
शिवनारायण गुप्ता: पूर्व संयुक्त महामंत्री (कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य न होने वाले लोगों को पद देने के विरोध में इस्तीफा)
सरिता सिंह: संयुक्त महामंत्री (निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप)
बिजेन्द्र गोयल: महामंत्री (वरिष्ठों से सलाह न लेने और नए चेहरों की नियुक्ति पर असंतोष)
पुष्पेंद्र सिंह: सचिव (पार्टी विरोधियों को महत्व देने से आहत होकर इस्तीफा)
पवन दीवान: सचिव (विधानसभा चुनाव में विरोध करने वालों की नियुक्ति पर नाराजगी)
द्वारिका प्रसाद राजवाड़े: संयुक्त महामंत्री (विभागीय व्यस्तता और संगठन के मौजूदा स्वरूप पर असहजता)
भावना सिंह नेताम: कार्यकारिणी सदस्य (बिना जानकारी के पद देने और असहजता के कारण इस्तीफा)
“सिपाही बने रहेंगे, पर वर्तमान नेतृत्व के साथ काम करना मुश्किल”
इस्तीफा देने वाले सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा है कि वे कांग्रेस पार्टी की विचारधारा के प्रति सदैव समर्पित रहेंगे और एक सच्चे सिपाही के रूप में कार्य करते रहेंगे, लेकिन वर्तमान जिला कार्यकारिणी के गठन के तरीकों से वे खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं।
इस सामूहिक इस्तीफे के बाद अब सबकी निगाहें प्रदेश नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे सूरजपुर कांग्रेस के इस असंतोष को थामने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

















