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गौवंश संरक्षण की दिशा में पहल: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया सुरभि गौधाम का वर्चुअल शुभारंभ

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सूरजपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा वर्चुअल रूप में उपस्थित होकर सूरजपुर में निराश्रित एवं घुमंतू गौवंश के संरक्षण और समुचित व्यवस्थापन के लिए सुरभि गौधाम का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम गायत्री मंदिर परिसर में आयोजित किया गया था। इस सुरभि गौधाम का संचालन मां भगवती देवी गौ सेवा समिति द्वारा किया जाएगा। इस शुभारंभ कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद सूरजपुर की अध्यक्ष कुसुमलता रजवाड़े,पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष भीमसेन अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ विजेंद्र सिंह पाटले, एडिशनल एसपी रितेश चौधरी, एसडीएम सूरजपुर शिवानी जायसवाल तथा पशुपालन विभाग के डीडी नृपेंद्र सिंह , माँ भगवती गौशाला समिति के अध्यक्ष भोला प्रसाद अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री साय ने बिलासपुर जिले के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रेक्षागार में आयोजित कार्यक्रम से प्रदेश में गौधाम योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। इस दौरान सूरजपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 29 गौधामों का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम, छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में यह योजना एक महत्वपूर्ण कड़ी है। गाय एक ऐसी प्राणी है जिसके सबकुछ उपयोगी है। इस योजना के आने से सड़को पर अब गौवंशी पशुओं का संरक्षण किया जा सकेगा। इसके अलावा इस योजना अंतर्गत पशुपालकों को गौ उत्पाद से बनने वाले अन्य उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। निश्चित रूप से यह पशुपालकों को आर्थिक सहयोग प्रदान करेगा।

सरकार की इस योजना के तहत राज्य के प्रत्येक विकासखंड में 10 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अनुसार पूरे राज्य में कुल 1460 गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जहां गौवंश के लिए शेड, फेंसिंग, पेयजल और बिजली जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वर्तमान में शासन द्वारा 36 गौधामों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है, जिनमें से 29 गौधामों का पंजीयन छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग में हो चुका है।

गौधाम योजना का मुख्य उद्देश्य निराश्रित, घुमंतू और जब्त किए गए गौवंश का संरक्षण एवं संवर्धन सुनिश्चित करना है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न मदों में वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। योजना के तहत गौवंश के पोषण आहार के लिए पहले वर्ष 10 रुपये, दूसरे वर्ष 20 रुपये, तीसरे वर्ष 30 रुपये और चौथे वर्ष से 35 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु अनुदान दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त अधोसंरचना निर्माण एवं मरम्मत के लिए प्रति गौधाम प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। गौसेवकों को 13,126 रुपये तथा चरवाहों को 10,916 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। चारा विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रति एकड़ 47 हजार रुपये प्रतिवर्ष की सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें अधिकतम 5 एकड़ भूमि तक 2.35 लाख रुपये वार्षिक सहायता का प्रावधान है। प्रत्येक गौधाम में लगभग 200 गौवंश को रखने की व्यवस्था की गई है।

इस योजना के संचालन के लिए पंजीकृत गौशाला समितियां, स्वयंसेवी संस्थाएं, ट्रस्ट, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां और सहकारी समितियां पात्र होंगी। इस पहल से निश्चित रुप से सड़कों और गांवों में घूमने वाले निराश्रित पशुओं के आवास की समस्या में कमी आएगी और गौवंश संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

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