अंबिकापुर /बलरामपुर – लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला! छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिसिया कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। ‘भारत सम्मान न्यूज़’ ने जब बसंतपुर थाना प्रभारी के कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का कच्चा चिट्ठा खोला, तो साहब को ‘कानून’ याद आ गया। लेकिन ट्विस्ट ये है कि साहब खुद ही आरोपी हैं और खुद ही जज बनकर पत्रकार को ‘समन’ जारी कर रहे हैं!
पत्रकार को डराने की कोशिश? – बसंतपुर थाना प्रभारी ने ‘भारत सम्मान न्यूज़’ के प्रधान संपादक जितेन्द्र कुमार जायसवाल और उनके संवाददाता को 3 दिन के भीतर थाने में हाजिर होने का नोटिस थमा दिया है। आरोप है कि खबर ‘भ्रामक’ है।
सवाल उठता है
क्या अब पुलिस तय करेगी कि कौन सी खबर सच है और कौन सी झूठ?
जिस अधिकारी के खिलाफ वसूली के आरोप लगे, वही अधिकारी नोटिस जारी करने का पावर कहाँ से लाया?
क्या यह सीधे तौर पर प्रेस की आजादी का गला घोंटने और पत्रकार को डराने-धमकाने की साजिश नहीं है?
आईजी के दरबार में गूँजी शिकायत : “साहब, ये पद का दुरुपयोग है!” इस ‘खाकी के खौफ’ के खिलाफ प्रधान संपादक जितेन्द्र जायसवाल ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आईजी सरगुजा रेंज को पत्र लिखकर बसंतपुर थाना प्रभारी की कुंडली खोल दी है।
शिकायत का सार साफ़ है: “अगर खबर में गलती थी तो उच्च अधिकारी जांच करते, लेकिन जिस पर आरोप लगा वही थाने बुलाकर दबाव बना रहा है। यह सरासर तानाशाही है!”
जनता पूछ रही है सवाल :
ट्रैक्टर जब्ती और 10,000 की रिश्वत का क्या सच है?
क्या पुलिस विभाग अपने ही दागी अधिकारियों को बचाने के लिए पत्रकारों को निशाना बना रहा है?
क्या बसंतपुर में संविधान का नहीं, बल्कि ‘थाना प्रभारी’ का अपना कानून चलता है?
सच की आवाज दबेगी नहीं! -‘भारत सम्मान न्यूज़’ ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस ‘नोटिस पॉलिटिक्स’ से डरने वाले नहीं हैं। मामला अब आईजी की मेज पर है। अब देखना यह है कि क्या खाकी के रसूख के आगे न्याय की जीत होगी या फिर सत्ता के नशे में चूर अधिकारी पत्रकारों को यूं ही ‘नोटिस’ का डर दिखाते रहेंगे।
“जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और सच दिखाने पर नोटिस थमाने लगे, तो समझ लीजिए दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है! बसंतपुर थाना प्रभारी की मनमानी के खिलाफ ‘भारत सम्मान न्यूज़’ की जंग जारी है। क्या आईजी सरगुजा करेंगे न्याय?”
























