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पंचायत भवन बना PDS गोदाम, जनप्रतिनिधि बेबस, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल ?

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सूरजपुर/भैयाथान- जिले के ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक अव्यवस्था का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां पंचायत भवन अपने मूल उद्देश्य से भटककर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का गोदाम बन गया है। स्थिति यह है कि जनप्रतिनिधियों को बैठने तक के लिए जगह नसीब नहीं हो रही।

बार-बार गुहार, फिर भी नहीं सुनवाई

जिला उप सरपंच संघ सूरजपुर के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि इस समस्या को लेकर 4 बार लिखित आवेदन दिए गए, कई बार मौखिक रूप से अधिकारियों को अवगत कराया गया, यहां तक कि सुशासन तिहार में भी शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उपसरपंच का बयान

ग्राम पंचायत के उपसरपंच ने भी इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पंचायत भवन जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान का केंद्र होता है, लेकिन आज हालत यह है कि हम अपने ही कार्यालय में बैठने के लिए जगह तलाश रहे हैं। एक ही कमरे में सारे काम निपटाने पड़ रहे हैं, जिससे न तो सही तरीके से बैठक हो पा रही है और न ही लोगों की समस्याओं का समाधान।”

PDS भवन का अभाव बना बड़ी वजह

गांव में अलग से PDS भवन नहीं होने के कारण पंचायत भवन को ही खाद्यान्न भंडारण केंद्र बना दिया गया है। इसके चलते पंचायत के अधिकांश कक्ष राशन के बोरो से भरे पड़े हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों को भी आवश्यक सेवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है।

पंचायत व्यवस्था पर असर

पंचायत भवन, जो जनसुनवाई, बैठकों और विकास योजनाओं के संचालन का मुख्य केंद्र होता है, वह अब अपनी मूल भूमिका निभाने में असमर्थ है। इससे विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है और जनप्रतिनिधियों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है।

जनप्रतिनिधियों की मांग

पंचायत भवन को तत्काल खाली कराया जाए, अलग से PDS भवन का निर्माण किया जाए, प्रशासन इस समस्या पर जल्द ठोस कदम उठाए।

अधिकारी का बयान

मुख्य कार्यपालन अधिकारी भैयाथान विनय कुमार गुप्ता ने कहा कि ग्राम पंचायत केवटाली में नवीन पीडीएस भवन निर्माण हेतु प्रस्ताव प्रेषित कर दिया गया है। स्वीकृति प्राप्त होते ही निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को जल्द ही एक सुव्यवस्थित और सुविधाजनक पीडीएस भवन उपलब्ध हो सकेगा।

बड़ा सवाल, जवाबदेही कब तय होगी?

जब जनप्रतिनिधि ही अपने कार्यालय में बैठने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा? क्या प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेकर स्थिति सुधारेगा, या फिर यह समस्या यूं ही बनी रहेगी?

फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुका है, जिस पर त्वरित कार्रवाई की जरूरत है।

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