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विधिक जागरूकता कार्यक्रम: न्यायाधीश ने छात्रों को कानूनी अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति किया जागरूक

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पॉक्सो एक्ट, आईटी एक्ट, मोटर व्हीकल एक्ट एवं निःशुल्क विधिक सहायता पर दी विस्तृत जानकारी

सूरजपुर — विनीता वार्नर, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर के मार्गदर्शन में आज शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज सूरजपुर में कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आनंद प्रकाश वारियाल, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय सूरजपुर ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायाधीश एवं महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया।

पॉक्सो एक्ट की गंभीरता से कराया अवगत

अपने उद्बोधन में न्यायाधीश वारियाल ने पॉक्सो एक्ट 2012 (POCSO Act) के प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए छात्रों को इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले अपराधों की गंभीरता, साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया एवं न्यायालयीन प्रक्रिया के महत्वपूर्ण बिंदुओं से अवगत कराया। उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से इन अपराधों से जुड़े खतरों एवं दुष्परिणामों को सरल भाषा में समझाया।

मोबाइल एवं इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग पर दी सलाह

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के प्रावधानों की विवेचना करते हुए न्यायाधीश महोदय ने कहा कि आज के समय में मोबाइल फोन प्रत्येक व्यक्ति के पास उपलब्ध है, जिसमें अच्छी और बुरी दोनों प्रकार की सामग्री मिलती है। उन्होंने कहा कि मोबाइल के माध्यम से किया गया कोई भी कार्य कभी छुपता नहीं है, अतः मोबाइल एवं इंटरनेट का उपयोग पूर्ण सावधानी के साथ केवल पढ़ाई एवं अच्छी चीजें सीखने के लिए ही करना चाहिए।

निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के प्रावधानों पर बोलते हुए न्यायाधीश वारियाल ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के व्यक्तियों के लिए तहसील न्यायालय से लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय तक निःशुल्क विधिक सहायता एवं सलाह प्रदान करने हेतु विधिक सेवा प्राधिकरणों का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में अनेक लोग स्वयं को असहाय एवं कमजोर मानकर आत्महत्या जैसा अनुचित कदम उठा लेते हैं, जो अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या में स्वयं को कभी कमजोर न समझें, क्योंकि देश के सभी न्यायालयों में विधिक सेवा संस्थाएं सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जहां सक्षम सलाह के साथ-साथ कानूनी सहायता पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जाती है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि किसी भी प्रकार की सहायता हेतु न्यायालय परिसर में स्थापित विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय जाकर अथवा नालसा (NALSA) के टोल फ्री नंबर 15100 पर संपर्क कर अपनी समस्या अवश्य बताएं।

मोटर व्हीकल एक्ट एवं यातायात नियमों पर विशेष जोर

मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देते हुए न्यायाधीश महोदय ने ड्राइविंग लाइसेंस एवं वाहन बीमा को अनिवार्य बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ये दोनों दस्तावेज नहीं होंगे तो दुर्घटना की स्थिति में वाहन स्वामी को आपराधिक मुकदमे का सामना करने के साथ-साथ बड़े आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यातायात नियमों के कड़ाई से पालन पर विशेष जोर दिया।

छात्रों एवं शिक्षकों ने पूछे प्रश्न

न्यायाधीश महोदय के ज्ञानवर्धक वक्तव्य से उपस्थितजन इतने प्रभावित हुए कि छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों ने भी अनेक प्रश्न पूछे, जिनका न्यायाधीश महोदय ने बड़े ही सरल एवं सहज भाषा में उत्तर देकर उनकी जिज्ञासा शांत की।

कार्यक्रम का संचालन लेक्चरर विवेक मेहता ने अत्यंत सहज एवं रोचक शब्दों में किया, जबकि लेक्चरर अवधेश जी ने विद्यालय परिवार की ओर से न्यायाधीश महोदय के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य एन. योगेश, समस्त शिक्षकगण एवं पैरालीगल वॉलंटियर्स सत्य नारायण एवं उमेश कुमार रजवाड़े विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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