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देवदूत बनी एम्बुलेंस टीम: चलती गाड़ी में थमी नवजात की धड़कनें, पांच मिनट के संघर्ष के बाद EMT ने दिया जीवनदान

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अम्बिकापुर- चिकित्सा जगत में तकनीकी कौशल और समय पर लिए गए निर्णय कैसे किसी की जान बचा सकते हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अम्बिकापुर में देखने को मिला। यहाँ एक दिन के नवजात शिशु को गंभीर हृदय संबंधी समस्या (Cardiac Problem) के कारण बेहतर उपचार के लिए रायपुर स्थित मेकाहारा (MEKAHARA) अस्पताल रेफर किया गया था। लेकिन रास्ते में अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी ने टीम की परीक्षा ले ली।

अचानक 38 तक गिरी हृदय गति

अम्बिकापुर से रायपुर के लंबे सफर के दौरान चलती एम्बुलेंस में अचानक नवजात की स्थिति नाजुक हो गई। मॉनिटर पर बच्चे की धड़कनें तेजी से गिरते हुए मात्र 38 प्रति मिनट तक पहुँच गईं, जो एक नवजात के लिए मृत्यु के समान स्थिति थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एम्बुलेंस में तैनात ईएमटी (EMT) संतोष कुमार सिंह ने बिना समय गंवाए तत्काल ईआरसीपी (ERCP) डॉ. पंकज से संपर्क साधा और फोन पर ही विशेषज्ञ परामर्श लिया।

5 मिनट का ‘गोल्डन पीरियड’ और सफल CPR

विशेषज्ञ डॉक्टर के निर्देशानुसार, टीम ने एम्बुलेंस के भीतर ही नवजात को सीपीआर (CPR) देना शुरू किया। करीब पांच मिनट तक चले इस जीवन-मरण के संघर्ष के बाद चमत्कारिक परिणाम देखने को मिले। बच्चे की धड़कनें धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हुईं और पहले 78, फिर 80 और अंततः 120 प्रति मिनट के सामान्य स्तर पर लौट आईं। बच्चे की स्थिति स्थिर होते ही एम्बुलेंस को तेज गति से रायपुर की ओर रवाना किया गया।

टीम ने पेश की मानवता की मिसाल

बच्चे को सुरक्षित रूप से रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका उपचार जारी है। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में ईएमटी संतोष कुमार सिंह, पायलट तीरथ यादव, ईएमई राकेश सुतवंशी और पीएम शैलेश की टीम ने अपनी कुशलता का परिचय दिया। डॉ. पंकज के सटीक मार्गदर्शन और टीम के आपसी समन्वय ने एक मासूम की जान बचाकर मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य सेवाओं का मान बढ़ाया है। अब इस साहसिक कार्य की हर तरफ सराहना हो रही है।

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