मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल मिलते ही 14 वर्षीय दिव्यांग बालक के चेहरे पर खिली मुस्कान
सूरजपुर- कभी-कभी जीवन की सबसे बड़ी खुशियां छोटी-छोटी पहल से मिलती हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील सोच के अनुरूप जब प्रशासन स्वयं गांव-गांव पहुंचकर आमजन की पीड़ा को सुन रहा है और उसका तत्काल समाधान कर रहा है, तब ऐसी ही एक हृदयस्पर्शी कहानी जिले के खोपा गांव से सामने आई है। यहां आयोजित पहले समाधान शिविर ने एक 14 वर्षीय दिव्यांग बालक की जिंदगी को वह उड़ान दी, जिसका सपना उसने वर्षों से अपनी आंखों में संजोकर रखा था।
हर सुबह एक नया संघर्ष लेकर आती थी आदित्य के लिए:-
खोपा निवासी आदित्य देवांगन जन्म से ही दिव्यांग है। वह शासकीय माध्यमिक शाला चेरा का छात्र है, लेकिन उसके हाथ-पैर ठीक तरीके से कार्य नहीं कर पाते। रोजमर्रा के साधारण कार्य भी उसके लिए किसी पहाड़ चढ़ने जैसी चुनौती से कम नहीं थे। स्कूल जाना, दोस्तों से मिलना-जुलना और घर के छोटे-मोटे कार्यों में हाथ बंटाना, ये सब उसके लिए दूर के सपने थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह बेटे को वह सहारा दे पाए, जिसकी उसे सबसे अधिक आवश्यकता थी। बेटे की पीड़ा देखकर मां की आंखें कई बार नम हो जाती थीं, मगर बेबसी के सिवा कुछ नहीं था।
एक खबर ने जगाई उम्मीद की किरण:-
आदित्य ने भावुक स्वर में बताया कि जब उसकी मां को सुशासन तिहार-2026 के बारे में जानकारी मिली, तो मानो अंधेरे में एक रोशनी की किरण फूट पड़ी। मां ने तुरंत खोपा शिविर में पहुंचकर मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। प्रशासन ने इस आवेदन को मात्र कागज का टुकड़ा नहीं माना, बल्कि एक मां की पीड़ा और एक बच्चे के सपने को समझा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप त्वरित कार्यवाही करते हुए समाधान शिविर में ही आदित्य को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल सौंप दी गई। यह क्षण आदित्य और उसके परिवार के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था।
अब खुले आसमान की ओर उड़ान भरेंगे आदित्य के सपने:-
ट्राइसाइकिल मिलते ही आदित्य की आंखों में चमक आ गई और चेहरे पर ऐसी मुस्कान खिल उठी, जो वर्षों से उसकी आंखों में दबे सपनों की गवाह थी। अब वह आत्मनिर्भर होकर स्कूल पहुंचेगा, दोस्तों के साथ हंसी-ठिठोली करेगा और घर के कार्यों में भी सहयोग कर सकेगा। जो जीवन कल तक चार दीवारों में सिमटा हुआ था, आज वही जीवन खुले आसमान की ओर उड़ान भरने को तैयार है। उसकी यह मुस्कान इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि शासन की एक संवेदनशील पहल किसी का पूरा जीवन बदलने की ताकत रखती है।
’डॉक्टर बनूंगा, समाज की सेवा करूंगा’’ – आदित्य का दृढ़ संकल्प
आदित्य ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उसका सपना पढ़-लिखकर डॉक्टर बनने और समाज की सेवा करने का है। उसने कहा कि अब वह बिना किसी पर निर्भर हुए स्कूल जा सकेगा और अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उसने कहा कि ष्सुशासन तिहार केवल एक शिविर नहीं, बल्कि श्संवाद से समाधानश् का सशक्त माध्यम हैष्, जिसने उसके जैसे न जाने कितने जरूरतमंदों के जीवन में आशा की किरण जगाई है। आदित्य के इस संकल्प में वह दृढ़ता है, जो किसी भी शारीरिक सीमा से कहीं ऊपर है।
मां की आंखों में छलकी कृतज्ञता के आंसू
आदित्य की मां ने भावुक होते हुए शासन-प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मात्र एक आवेदन पर तत्काल समाधान कर शासन ने उनके परिवार को वह खुशी दी है, जिसकी वे वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा, ष्यह केवल एक ट्राइसाइकिल नहीं, बल्कि मेरे बेटे के सपनों को पंख देने वाला सहारा है।ष् उनकी आंखों में छलकते कृतज्ञता के आंसू इस बात का प्रमाण थे कि सुशासन तिहार ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब शासन संवेदनशील होकर जनता के द्वार तक पहुंचता है, तो असंभव दिखने वाले समाधान भी सहज हो जाते हैं।
सुशासन तिहार-2026: हर जरूरतमंद के लिए आशा का दूसरा नाम
आदित्य की यह कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सुशासन तिहार-2026 शासन की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का एक सशक्त मंच बन चुका है। यह तिहार न केवल समस्याओं का समाधान कर रहा है, बल्कि लोगों के जीवन में नई आशा, नया विश्वास और नई दिशा भी प्रदान कर रहा है। आदित्य जैसे न जाने कितने जरूरतमंदों के लिए यह तिहार उनके सपनों को साकार करने वाला माध्यम बन रहा है। यह वह संकल्प है, जहां शासन और जनता के बीच की दूरियां मिटती हैं और ष्सबका साथ, सबका विकासष् का सपना साकार होता है।



















