सहकारी समितियों के माध्यम से निर्धारित दरों पर उपलब्ध होंगे उर्वरक
सूरजपुर- छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा खरीफ सीजन 2026 के लिए रासायनिक उर्वरकों की नवीन विक्रय दरें जारी कर दी गई हैं। जारी आदेश के अनुसार यूरिया, डीएपी, विभिन्न ग्रेड के एनपीके उर्वरक तथा एमओपी उर्वरक का विक्रय सहकारी समितियों एवं विपणन संघ के माध्यम से निर्धारित दरों पर किया जाएगा।
जारी दर सूची के अनुसार 45 किलोग्राम की यूरिया बोरी का मूल्य 266.50 रुपये निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार 50 किलोग्राम डीएपी उर्वरक 1,350 रुपये प्रति बोरी की दर से उपलब्ध होगा। एनपीके 12ः32ः16 एवं एनपीके 10ः26ः26 उर्वरक 1,990 रुपये प्रति बोरी तथा एनपीके 20ः20ः0ः13 उर्वरक 1,850 रुपये प्रति बोरी की दर से किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं एमओपी उर्वरक का विक्रय मूल्य 1,975 रुपये प्रति बोरी निर्धारित किया गया है।
विपणन संघ द्वारा स्पष्ट किया गया है कि नवीन दरें तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। हालांकि समितियों एवं विपणन संघ के पास उपलब्ध पुराने स्टॉक का विक्रय पूर्व निर्धारित एमआरपी पर ही किया जाएगा। नई एमआरपी वाले उर्वरकों की प्राप्ति के बाद उनका विक्रय नवीन दरों के अनुसार किया जाएगा।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का चयन करें तथा संतुलित पोषण के लिए डीएपी के साथ एनपीके एवं एमओपी जैसे उर्वरकों का भी उपयोग करें। विभाग के अनुसार एनपीके ग्रेड उर्वरकों में नत्रजन एवं फास्फोरस के साथ पोटाश अथवा सल्फर भी उपलब्ध होता है, जिससे फसलों को संतुलित पोषण प्राप्त होता है।
विभाग ने किसानों से डीएपी का अंधाधुंध उपयोग नहीं करने तथा संतुलित उर्वरक अपनाने की अपील की है। उर्वरकों का उपयोग अनुशंसित मात्रा में करने, खरीद के समय रसीद अवश्य लेने तथा उर्वरकों का भंडारण सूखे एवं सुरक्षित स्थान पर करने की सलाह भी दी गई है।
डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके 12ः32ः16 को प्रारंभिक वृद्धि एवं जड़ विकास के लिए उपयोगी बताया गया है। एनपीके 20ः20ः0ः13 सल्फर युक्त होने के कारण दलहनी एवं तिलहनी फसलों के लिए लाभकारी है, जबकि एनपीके 10ः26ः26 फसल की वृद्धि, दानों की गुणवत्ता एवं उत्पादन बढ़ाने में सहायक माना गया है। इसी प्रकार एमओपी के उपयोग से पोटाश की पूर्ति होती है, जिससे फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं दानों की गुणवत्ता में सुधार होता है।
किसानों से अपील की गई है कि वे सहकारी समितियों से निर्धारित दरों पर ही उर्वरक प्राप्त करें तथा किसी भी प्रकार की अधिक दर वसूली या कालाबाजारी की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।
इसके अलावा ‘संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाएं – अधिक उत्पादन, अधिक लाभ पाएं‘ के संदेश के साथ विभाग ने किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया है।


















