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9 सूत्रीय मांगों को लेकर सूरजपुर में कल 12 बजे से ‘रेल रोको आंदोलन’, जिला कांग्रेस ने प्रशासन को दी चेतावनी

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सूरजपुर- क्षेत्र के विकास और परसा कोल ब्लॉक भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के हक में उठाई गई 9 सूत्रीय मांगों पर कोई सकारात्मक पहल न होने के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी, सूरजपुर ने उग्र आंदोलन का ऐलान कर दिया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह के नेतृत्व में प्रशासन को लिखित सूचना सौंपकर चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सोमवार, 8 जून 2026 को दोपहर 12:00 बजे से स्थान L-C-10 पर उग्र ‘रेल रोको आंदोलन’ किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और संबंधित कंपनी प्रबंधन की होगी।

3 महीने से लंबित हैं संवेदनशील मुद्दे

कांग्रेस का आरोप है कि आज से ठीक तीन महीने पूर्व अडानी कंपनी और स्थानीय प्रशासन के समक्ष क्षेत्र के प्रभावितों के हक में 9 सूत्रीय मांगें रखी गई थीं। इस पर दिनांक 5 जून 2026 तक कोई ठोस निर्णय या सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। संवादहीनता और प्रशासन की बेरुखी से नाराज होकर अब कांग्रेस ने ग्रामीणों के साथ मिलकर चक्काजाम और रेल रोकने का निर्णय लिया है।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें:

भूमि वापसी और मुआवजा- इफको कंपनी द्वारा अधिग्रहित कर अडानी कंपनी को हस्तांतरित की गई ग्राम नमना, रघुनाथपुर, सलका, मुड़गांव, नारायणपुर और कठमुण्डा की भूमि का आवंटन तत्काल निरस्त कर मूल भू-स्वामी किसानों को वापस सौंपा जाए। साथ ही परसा कोल ब्लॉक से प्रभावित सभी किसानों के लंबित मुआवजे का अविलंब भुगतान हो।

बुनियादी ढांचा और विकास- स्थान L-C-10 से पण्डोपारा मोहल्ला तक तत्काल पक्की सड़क बनाई जाए। इसके अलावा सलका और वृंदावन के मध्य जंगल में ओवरब्रिज का निर्माण किया जाए।

सुविधाएं और रोजगार- ग्रामीणों के लिए 10 नए हैंडपंप और लिफ्ट इरिगेशन (उद्वहन सिंचाई) की स्थापना की जाए। रेलवे प्रभावित परिवारों को स्थायी रोजगार, क्षेत्र में शिक्षा के लिए CBSE स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए विशेष अस्पताल परियोजनाएं शुरू की जाएं।

ग्राम सभा का अधिकार- परसा कोल ब्लॉक हेतु वन विभाग द्वारा काटे गए वृक्षों की कुल राशि का 30 प्रतिशत हिस्सा नियमानुसार संबंधित ग्राम सभा के कोष में जमा कराया जाए।

प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की होगी जिम्मेदारी

कांग्रेस जिला अध्यक्ष शशि सिंह ने साफ किया है कि प्रभावित जनता को उनके अधिकार दिलाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। सोमवार को दोपहर 12:00 बजे से शुरू होने वाले इस उग्र आंदोलन के कारण क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति और आम जनता को होने वाली असुविधा की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन, स्थानीय प्रशासन और संबंधित कंपनी प्रबंधन की होगी। पत्र में स्थानीय ग्रामीणों की सहमति और हस्ताक्षर भी शामिल हैं, जिससे इस आंदोलन में भारी जनसैलाब जुटने की संभावना जताई जा रही है।

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