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प्रेमनगर में फूटा ग्रामीणों का जन-आक्रोश: अडाणी को जमीन सौंपने के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व में ऐतिहासिक ‘रेल रोको’ आंदोलन

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जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह की अगुवाई में 6 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने ट्रैक पर किया चक्काजाम, प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम, मांगें पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी।

सूरजपुर/प्रेमनगर- जल, जंगल, जमीन और अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए आज प्रेमनगर विधानसभा के ग्राम सलका (L-C-10 फाटक) पर एक ऐतिहासिक और विशाल जन-आक्रोश प्रदर्शन किया गया। इफ़को (IFFCO) पावर प्लांट के लिए पूर्व में अधिग्रहित की गई जमीन को कॉरपोरेट घराने अडाणी समूह को सौंपने के खिलाफ और ग्रामीणों की 9 सूत्रीय जायज मांगों को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह के नेतृत्व में प्रभावित 6 ग्राम पंचायतों (सलका, नमना, रघुनाथपुर, मुड़गांव, नारायणपुर, कठमुड़ा) के हजारों ग्रामीणों ने हुंकार भरी।

शासन-प्रशासन के कानों तक जनता की आवाज पहुंचाने के लिए आक्रोशित ग्रामीणों ने अपनी चट्टानी एकता का परिचय देते हुए ट्रेन की पटरियों पर बैठकर उग्र ‘रेल रोको’ प्रदर्शन (चक्काजाम) किया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने कॉरपोरेटपरस्ती और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, 15 दिनों का अल्टीमेटम

आंदोलन के दौरान मौके पर पहुंचे स्थानीय तहसीलदार को आंदोलनकारियों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम एक 9 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह और ग्रामीण नेताओं ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में 15 दिवस का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समयावधि के भीतर ग्रामीणों की जायज मांगें पूरी नहीं की गईं और ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो क्षेत्र की जनता अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

अडाणी को जमीन देने का खेल बंद करे सरकार” — जिलाध्यक्ष

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने कहा कि इफ़को प्लांट के नाम पर जिन गरीब किसानों की जमीनें ली गई थीं, उन्हें धोखे से अडाणी कंपनी को सौंपने की साजिश रची जा रही है। ग्रामीण अपनी पैतृक जमीन किसी भी कीमत पर अडाणी को नहीं देना चाहते। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस पार्टी किसानों और आदिवासियों की इस न्यायपूर्ण लड़ाई में कदम से कदम मिलाकर खड़ी है। जब तक प्रभावितों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता, यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

आंदोलन की प्रमुख 9 सूत्रीय मांगें

ग्रामीणों और कांग्रेस नेतृत्व द्वारा प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित न्यायसंगत मांगें रखी गईं, जिन पर अविलंब ठोस निर्णय लेने की मांग की गई है:

अधोसंरचना, जनसुविधा एवं रोजगार संबंधी मांगें:

सड़क निर्माण- 4-C-10 से पण्डोपारा मोहल्ला तक तत्काल पक्की सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया जाए।

ओवरब्रिज निर्माण- सालका एवं वृंदावन के मध्य जंगल क्षेत्र में ग्रामीणों की सहूलियत के लिए ओवरब्रिज बनाया जाए।

पेयजल व सिंचाई- क्षेत्र में गंभीर जल संकट को देखते हुए ग्रामीणों हेतु 10 नवीन हैंडपंपों का खनन हो तथा कृषि के लिए ‘लिफ्ट इरिगेशन’ (उद्वहन सिंचाई) प्रणाली की स्थापना की जाए।

रोजगार व मूलभूत सुविधाएं- रेलवे और उद्योगों से प्रभावित स्थानीय परिवारों के युवाओं को स्थायी रोजगार दिया जाए तथा क्षेत्र में शिक्षा व स्वास्थ्य की विशेष परियोजनाएं शुरू की जाएं।

भूमि, मुआवजा एवं किसान कल्याण संबंधी मांगें

भूमि वापसी- इफ़को कंपनी द्वारा अधिग्रहित कर अडाणी कंपनी को हस्तांतरित की गई ग्राम नमना, रघुनाथपुर, मुड़गांव, नारायणपुर एवं कठमुण्डा की भूमि का आवंटन तत्काल निरस्त किया जाए और उसे मूल भूमिस्वामी किसानों को वापस लौटाया जाए।

परसा कोल ब्लॉक मुआवजा- परसा कोल ब्लॉक से प्रभावित समस्त विस्थापित व प्रभावित किसानों की लंबे समय से रुकी हुई मुआवजा राशि का अविलंब शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित हो।

ग्राम सभा का अधिकार- परसा कोल ब्लॉक हेतु वन विभाग द्वारा की गई वृक्षों की कटाई की कुल राशि का 30% हिस्सा नियमानुसार संबंधित ग्राम सभा के कोष में जमा कराया जाए, ताकि स्थानीय विकास हो सके।

इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह, इस्माइल ख़ान, विद्यासागर सिंह, अरविंद यादव, आलोक साहू, जगत लाल आयाम, सुनील सारथी, संतोष पावले, अविनाश साहू, रोहित कनौजे, आलोक जागते, शतवंत सिंह, राजू रजवाड़े, विजय देवांगन, गुणेश्वर सोरी, चैत्रपाल गणेश्वर झम्मन सिंह, चमन इक्का, चरण सिंह, केशव साहू, हरि बैगाइमरान, इमरान अंसारी, लिवनेश सिंह, आशीष सिंह समेत कांग्रेसी कार्यकर्ता एवं हजारो की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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