सूरजपुर- वनमंडल सूरजपुर के प्रतापपुर परिक्षेत्र अंतर्गत वन भूमि की सुरक्षा और वन संपदा के संरक्षण को लेकर विभाग अत्यंत गभीर और सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी सिलसिले में आज 10 जून 2026 को एक बड़ी संयुक्त राजस्व, पुलिस और वन प्रशासनिक कार्यवाही करते हुए ग्राम सिलौटा में वन भूमि किए गए अवैध अतिक्रमण और निर्माण को पूर्ण रूप से हटा दिया गया है।
वैधानिक प्रक्रिया एवं पूर्व सूचना- प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत टुकुडांड सर्किल के चंद्रेली बीट कक्ष क्रमांक पी-68 में दो अतिक्रमणकारियों महत्तम पिता रामचंद्ऱ एवं सुखन पिता बिगन ग्राम सिलौटा द्वारा वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर खेती का कार्य किया जा रहा था तथा साथ ही अवैध कच्चे मकान का निर्माण भी कर लिया गया था। उक्त कृत्य के विरूद्ध वन विभाग द्वारा पूर्व में ही सुसंगत धाराओं के तहत वन अपराध पंजीबद्ध किया गया था।
भारतीय वन अधिनियम, 1972 की धारा 72 के अंतर्गत संबंधित व्यक्तियों को बेदखली हेतु ‘कारण दर्शाओं सूचना पत्र‘ पूर्व में ही विधिवत तामील कराया जा चुका था। इसके अतिरिक्त दिनांक 05 जून 2026 को ग्राम पंचायत सिलौटा में मुनादी कर सार्वजनिक रूप से अंतिम चेतावनी दी चुकी थी। तत्पश्चात् विभाग द्वारा 48 घंटे का अंतिम समय देकर संपूर्ण सामान खाली करने का निर्देश दिया गया था।
10 जून 2026 को की गई बेदखली की अंतिम कार्यवाही- समयावधि समाप्त होने के उपरांत, आज वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार वन विभाग, जिला प्रशासन, राजस्व और पुलिस बल की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण रोधी अभियान चलाया। इसके तहत वन कक्ष क्रमांक पी-68 में किए गए अवैध निर्माण को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया और वन भूमि को अवैध कब्जे से शत-प्रतिशत मुक्त करा लिया गया। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि शासकीय और वन संपदा की रक्षा के लिए भविष्य में भी ऐसी प्रशासनिक और वैधानिक कड़ाई निरंतर जारी रहेगी।
कार्यवाही के दौरान उपस्थित प्रशासनिक टीम एवं विभागीय अमला- वन मंडलाधिकारी सूरजपुर के निर्देशानुसार उप वनमण्डलाधिकारी प्रतापपुर, वन परिक्षेत्राधिकारी प्रतापपुर, नायब तहसीलदार प्रतापपुर, पुलिस बल प्रतापपुर, समस्त परिक्षेत्र वन कर्मचारी उपस्थित होकर वन मंडल सूरजपुर के परिक्षेत्र प्रतापपुर में अतिक्रमण मुक्त कराने मे विशेष योगदान रहा।


















