सूरजपुर- कृषि को आत्मनिर्भर, आधुनिक और समृद्ध बनाने की दिशा में नैनो उर्वरक एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है। बदलते कृषि परिदृश्य में किसानों को परंपरागत रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस जैसे उन्नत विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि मिट्टी की सेहत और फसल उत्पादकता दोनों के लिए लाभकारी हैं।
जानकारी के अनुसार नैनो उर्वरक मिट्टी की उर्वरा शक्ति एवं जैविक संतुलन को बनाए रखने में सहायक होते हैं। ये भूजल प्रदूषण तथा रासायनिक अवशेषों को कम करने में प्रभावी हैं और पौधों तक पोषक तत्वों की अधिकतम एवं त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। इसके उपयोग से पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरक के प्रयोग से उत्पादन लागत में कमी आती है और बेहतर उपज की गारंटी मिलती है। तरल रूप में उपलब्ध होने के कारण इनका भंडारण एवं परिवहन भी सुगम है, साथ ही ड्रोन एवं स्प्रे तकनीक के माध्यम से इनका छिड़काव सरलता से किया जा सकता है, जिससे समय एवं श्रम दोनों की बचत होती है।


















