सूरजपुर- जनपद पंचायत भैयाथान में पिछले लगभग छह माह से सामान्य सभा की बैठक आयोजित नहीं होने का मामला अब गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। पंचायत राज व्यवस्था में सामान्य सभा को जनपद पंचायत का सर्वोच्च निर्णय मंच माना जाता है, जहां विकास कार्यों की समीक्षा, वित्तीय मामलों पर चर्चा, विभागीय प्रगति, लंबित प्रस्तावों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लिए जाते हैं। इसके बावजूद लंबे समय से बैठक नहीं होने से जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।
करोड़ों रुपये की लागत से संचालित सड़क, सीसी रोड, पुल-पुलिया, नाली, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी भवन, स्कूल भवन, पेयजल योजनाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा सहित विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा सामान्य सभा के माध्यम से की जाती है। ऐसे में लगातार बैठक नहीं होने से यह सवाल उठ रहा है कि इन योजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता, वित्तीय व्यय और विभागीय जवाबदेही की समीक्षा आखिर किस स्तर पर हो रही है।
बैठक नहीं होने का असर निर्वाचित जनपद सदस्यों की भूमिका पर भी पड़ रहा है। सामान्य सभा वह मंच है, जहां सदस्य अपने क्षेत्र की समस्याएं, जनता की शिकायतें और विकास संबंधी प्रस्ताव प्रशासन के समक्ष रखते हैं। लगातार बैठक टलने से जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सीमित होती दिखाई दे रही है, जिससे पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
क्षेत्र में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि यदि सामान्य सभा समय पर होती तो विकास कार्यों की गुणवत्ता, लंबित भुगतान, विभिन्न योजनाओं की प्रगति और विभागीय कार्यों की खुली समीक्षा संभव हो पाती। बैठक लगातार टलने से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं।
मामले में जनपद पंचायत अध्यक्ष सुलोचनी पैकरा ने बताया कि सामान्य सभा आयोजित कराने पर विचार किया जा रहा था। उनके अनुसार 8 अगस्त को बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रायपुर जाने के कारण बैठक नहीं हो सकी।
वहीं मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार गुप्ता ने अलग स्थिति बताते हुए कहा कि उनका रायपुर दौरा निरस्त हो गया था। उन्होंने कहा कि सामान्य सभा आयोजित नहीं हो पाने का मुख्य कारण अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच सहमति का अभाव रहा, जिसके चलते बैठक लगातार टलती रही।
अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी के बयानों में सामने आए विरोधाभास ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। एक ओर बैठक नहीं होने का कारण मुख्य कार्यपालन अधिकारी का रायपुर दौरा बताया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर स्वयं मुख्य कार्यपालन अधिकारी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच सहमति नहीं बनने को वजह बता रहे हैं। ऐसे में बैठक नहीं होने का वास्तविक कारण अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर छह माह से सामान्य सभा क्यों नहीं हुई? करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की समीक्षा किस मंच पर हो रही है? जनपद सदस्यों को अपने क्षेत्र की समस्याएं रखने का अवसर क्यों नहीं मिल रहा? लंबित प्रस्तावों और योजनाओं पर निर्णय किस प्रक्रिया से लिए जा रहे हैं? यदि बैठक नियमित रूप से नहीं हो रही है तो पंचायत राज व्यवस्था के प्रावधानों का पालन कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है?
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का कहना है कि जिला प्रशासन को पूरे मामले का संज्ञान लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि सामान्य सभा का आयोजन नियमानुसार नहीं हुआ है तो इसके कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए तथा शीघ्र सामान्य सभा आयोजित कर विकास कार्यों की सार्वजनिक समीक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जनपद पंचायत भैयाथान में सामान्य सभा नहीं होने का मामला अब केवल एक बैठक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विकास कार्यों की पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही, जनप्रतिनिधियों के अधिकार और पंचायत राज व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और सामान्य सभा का आयोजन आखिर कब होता है।


















