निर्माणाधीन डामरीकरण सड़क की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, लैब परीक्षण और दोषियों पर कार्रवाई की मांग, जनहित व करोड़ों की सरकारी राशि की सुरक्षा का मामला
सूरजपुर/प्रतापपुर- विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत चंदौरा–जज़ावल मार्ग पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत निर्माणाधीन डामरीकरण सड़क की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में ग्राम पंचायत केवरा निवासी जाहिद अंसारी ने कलेक्टर जनदर्शन में विस्तृत शिकायत प्रस्तुत कर निर्माण कार्य की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि चंदौरा–जज़ावल मार्ग पर निर्माणाधीन सड़क की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की प्रतीत हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सड़क का निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही डामर की ऊपरी परत हाथों से आसानी से उखड़ रही है। ग्रामीणों ने मौके पर सड़क की परत उखाड़कर उसका वीडियो भी बनाया है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहा
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि यह सड़क चंदौरा, चिकनी, जज़ावल, लांजित सहित आसपास के अनेक गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन इस मार्ग से यात्री बसों सहित सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन और ग्रामीण आवागमन करते हैं। यदि सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया तो सड़क अल्प समय में क्षतिग्रस्त हो सकती है और भविष्य में दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ सकती है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सड़क में शुरुआती स्तर पर ही गुणवत्ता संबंधी खामियां सामने आना अत्यंत गंभीर विषय है। इससे न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका उत्पन्न होती है, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि निर्माण एजेंसी द्वारा गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है तथा विभागीय स्तर पर प्रभावी निरीक्षण एवं निगरानी नहीं होने से निर्माण कार्य पर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायत में की गई प्रमुख मांगें:
सड़क निर्माण कार्य की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।
निर्माण में उपयोग की गई डामर, गिट्टी, बेस लेयर सहित अन्य सामग्री की मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच कराई जाए।
जांच पूरी होने तक आवश्यकतानुसार निर्माण कार्य एवं भुगतान पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
यदि जांच में अनियमितता या गुणवत्ता में कमी की पुष्टि होती है तो संबंधित ठेकेदार, अभियंता एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
दोषपूर्ण सड़क का पुनर्निर्माण भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कराया जाए।
जांच प्रतिवेदन एवं की गई कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ता को लिखित रूप से उपलब्ध कराई जाए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कलेक्टर जनदर्शन में प्राप्त इस शिकायत पर जिला प्रशासन किस प्रकार की कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराकर गुणवत्ता संबंधी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।


















