30% अनुपूरक सूची अब तक सार्वजनिक नहीं, एक क्षेत्र विशेष को लाभ पहुंचाने के आरोप; अध्यक्ष ने साधी चुप्पी, सीईओ बोले, सामान्य सभा के अनुमोदन से हुए कार्य
सूरजपुर/भैयाथान- जनपद पंचायत भैयाथान में वर्ष 2025-26 के 15वें वित्त आयोग (जनपद निधि) से स्वीकृत विकास कार्यों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों और जनपद पंचायत सदस्यों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों ने पूरी आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि विकास कार्यों के चयन में समानता और संतुलन का पालन नहीं किया गया तथा अधिकांश निर्माण कार्य एक ही क्षेत्र में केंद्रित कर दिए गए, जबकि कई अन्य क्षेत्रों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल सकी।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 15वें वित्त आयोग की टाइड एवं अनटाइड निधि से सीसी रोड, चबूतरा निर्माण, हैंडपंप खनन, तालाब गहरीकरण, स्कूल मरम्मत, सामुदायिक भवन, नाली निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों के लिए लाखों रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई। लेकिन जनपद पंचायत सदस्यों का दावा है कि यह पूरी तस्वीर नहीं है। उनका आरोप है कि कुल स्वीकृत राशि का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा एक अलग अनुपूरक सूची के माध्यम से स्वीकृत किया गया, जिसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया। इसी कारण पूरे आवंटन को लेकर संदेह और विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
जनपद पंचायत सदस्यों का कहना है कि यदि विकास कार्यों का चयन वास्तव में सामान्य सभा की स्वीकृति और निर्धारित नियमों के अनुरूप हुआ है, तो टाइड, अनटाइड और अनुपूरक—तीनों सूचियां सार्वजनिक की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि पूरी सूची सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस ग्राम पंचायत और किस क्षेत्र में कितनी राशि स्वीकृत हुई तथा विकास कार्यों के चयन का वास्तविक आधार क्या था।
मामले में मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार गुप्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जनपद पंचायत सदस्यों को किसी प्रकार का व्यक्तिगत फंड जारी नहीं किया जाता। सामान्य सभा द्वारा अनुमोदित विकास कार्यों के आधार पर ही राशि स्वीकृत होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन कार्यों को लेकर वर्तमान में सवाल उठाए जा रहे हैं, उनका अनुमोदन उनके कार्यभार ग्रहण करने से पहले आयोजित सामान्य सभा की बैठक में हुआ था तथा उस समय वे भैयाथान में पदस्थ नहीं थे।
वहीं, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुलोचनी पैकरा से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। निर्माण कार्यों के चयन, कथित असमान आवंटन और अनुपूरक सूची को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा, “मैं अभी कुछ नहीं बताऊंगी, बाद में बताऊंगी।” अध्यक्ष द्वारा तत्काल जवाब नहीं दिए जाने से पूरे मामले को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
इधर, जनपद पंचायत सदस्यों का कहना है कि यदि आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है, तो अनुपूरक सूची को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की हिचक नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि पूरी सूची सामने आने के बाद यह स्वतः स्पष्ट हो जाएगा कि विकास कार्यों का वितरण सभी क्षेत्रों में समान रूप से हुआ या नहीं।
अब पूरे मामले में निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि 15वें वित्त आयोग वर्ष 2025-26 की टाइड, अनटाइड एवं अनुपूरक सूची सार्वजनिक कर दी जाती है, तो आवंटन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सभी सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आ जाएगा। वहीं यदि सूची सार्वजनिक नहीं होती है, तो पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल और भी गहरे हो सकते हैं।


















