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सफलता की कहानी- जहाँ कभी पानी की थी चिंता, आज हर मौसम में जीवन का संबल बना जल स्रोत

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विकसित भारत जी-राम-जी योजना से बदली कालामांजल गाँव की तस्वीर, जल संरक्षण ने लौटाई ग्रामीणों के चेहरे पर मुस्कान

जल संरक्षण के साथ रोजगार का संबल, 250 से अधिक श्रमिकों को मिला काम

सूरजपुर- सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत कालामांजल की कहानी इस बात का सजीव उदाहरण है कि सामूहिक प्रयास और प्रभावी जल संरक्षण किस प्रकार किसी गांव की तस्वीर बदल सकते हैं। कभी यह गांव वर्षा के पानी को संजो नहीं पाता था। बारिश का अधिकांश पानी बह जाता था और गर्मी आते-आते जल स्रोत सूखने लगते थे। ग्रामीणों को पेयजल, मवेशियों के लिए पानी और खेती-किसानी जैसी दैनिक जरूरतों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पानी की चिंता यहां के लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई थी।

समय के साथ यह स्थिति बदली। विकसित भारत जी-राम-जी योजना के अंतर्गत कलेक्टर रेना जमील के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विजेंद्र सिंह पाटले के निर्देशन में गांव में बड़े पैमाने पर कंटूर ट्रेंच का निर्माण कराया गया। इसके साथ ही गेबियन चेक डैम का भी निर्माण कराया गया। इन संरचनाओं ने वर्षा जल को रोकने और संचित करने का कार्य किया। साथ ही मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण हुआ तथा जंगल से आने वाला कचरा भी डैम तक पहुंचने से पहले ही रुकने लगा। परिणामस्वरूप जल स्रोत स्वच्छ, सुरक्षित और वर्षभर उपयोगी बन गया।

ग्राम के मनोहर सिंह बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में पानी की तलाश ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता होती थी। मवेशियों को पानी पिलाने से लेकर खेती तक हर काम प्रभावित होता था। आज वही जल स्रोत पूरे वर्ष जीवित रहता है। ग्रामीण इस जल का उपयोग पेयजल, स्नान, कपड़े धोने, मवेशियों को पानी पिलाने तथा मत्स्य पालन जैसे कार्यों में कर रहे हैं। उनके अनुसार, अब गांव में पानी की उपलब्धता ने लोगों के जीवन में भरोसा और आत्मविश्वास दोनों बढ़ाया है।

सरपंच अर्जुन सिंह बताते हैं कि कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम बनने से केवल जल संरक्षण ही नहीं हुआ, बल्कि लगभग 250 से अधिक श्रमिकों को विकसित भारत जी-राम-जी योजना के माध्यम से रोजगार भी मिला। आज गांव के जल स्रोत पहले की तुलना में अधिक समृद्ध हैं और ग्रामीण भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। कालामांजल की यह सफलता दर्शाती है कि जब जल संरक्षण और जनभागीदारी साथ आते हैं, तो केवल पानी ही नहीं रुकता, बल्कि गांव की उम्मीदें, आजीविका और खुशहाली भी स्थायी रूप से संवरने लगती हैं। ग्रामीणों ने इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए शासन एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

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