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शासन के आदेश के बाद भी मंडल संयोजक, हॉस्टल अधीक्षक क्यों नहीं हटे ?

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शिक्षकों को मूल संस्था भेजने का फरमान कागजों में! 19 अगस्त का आदेश, 26 अगस्त तक कार्रवाई का अता-पता नहीं
एक शिक्षक मंडल संयोजक, दूसरा शिक्षक हॉस्टल अधीक्षक की जिम्मेदारी में मूल शैक्षणिक दायित्व से कब जोड़ेंगे? हमर उत्थान सेवा समिति ने उठाई जवाबदेही की मांग
सूरजपुर- शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर उनकी मूल संस्था में वापस भेजने के शासन के निर्देशों की सरगुजा संभाग में किस तरह अनदेखी हो रही है, इसे लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। 19 अगस्त 2026 को संयुक्त संचालक शिक्षा, सरगुजा संभाग ने पत्र क्रमांक 2488/स्था.-02/2026-27 जारी कर जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि मंडल संयोजक के पद पर संलग्न शिक्षकों को तत्काल उनकी मूल संस्था के लिए कार्यमुक्त किया जाए और 03 दिवस के भीतर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। लेकिन 26 अगस्त तक भी यदि मंडल संयोजक के पद पर शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, तो आखिर इस आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ?
जब आदेश में तत्काल कार्यमुक्ति और तीन दिन की समय-सीमा तय की गई थी, तो सात दिन बीत जाने के बाद भी संबंधित शिक्षक मूल विद्यालय में वापस क्यों नहीं पहुंचे? क्या संबंधित अधिकारियों ने आदेश को गंभीरता से नहीं लिया या फिर आदेश के पालन में जानबूझकर देरी की जा रही है? यदि कार्यमुक्ति हो चुकी है तो विभाग इसकी स्थिति सार्वजनिक करने से क्यों बच रहा है और यदि नहीं हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
मामला सिर्फ मंडल संयोजक तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार एक शिक्षक को हॉस्टल अधीक्षक की जिम्मेदारी में भी रखा गया है और उन्हें भी अब तक उनके मूल पद पर वापस नहीं भेजा गया है। ऐसे में सवाल यह है कि जब शासन स्वयं शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने का निर्देश दे चुका है, तो शिक्षक अब भी प्रशासनिक और अन्य गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों में क्यों लगाए जा रहे हैं? जिन स्कूलों में शिक्षकों की आवश्यकता है, वहां शिक्षक नहीं और दूसरी ओर शिक्षक मंडल संयोजक या हॉस्टल अधीक्षक जैसे दायित्वों में लगे रहें—क्या यही शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का तरीका है?
लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने 17 जुलाई 2026 को शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं लिए जाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ तो संभागीय स्तर से 19 अगस्त को दोबारा स्पष्ट निर्देश जारी करने पड़े। अब सवाल यह है कि जब दो स्तरों से निर्देश जारी हो चुके हैं, तो आखिर किस स्तर पर आदेश का पालन अटक रहा है?
हमर उत्थान सेवा समिति ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग से स्पष्ट जवाबदेही तय करने की मांग की है। समिति का कहना है कि शासन के आदेश केवल फाइलों में रखने के लिए नहीं होते। यदि किसी शिक्षक को मंडल संयोजक के पद से हटाने और मूल संस्था में भेजने का स्पष्ट आदेश जारी हुआ है, तो उसका पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। समिति ने मांग की है कि 19 अगस्त के आदेश के आधार पर जिलेवार यह स्पष्ट किया जाए कि कितने मंडल संयोजकों को कार्यमुक्त किया गया, कितने शिक्षक अब भी गैर-शैक्षणिक दायित्वों में हैं और तीन दिन के भीतर मांगा गया पालन प्रतिवेदन आखिर कहां है?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि आदेश में जिस मामले को “सर्वोच्च प्राथमिकता” दी गई थी, उसमें सात दिन बाद भी कार्रवाई अधूरी क्यों दिखाई दे रही है? क्या विभागीय आदेशों की समय-सीमा सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या आदेश जारी करने के बाद उसकी निगरानी करने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं है? और यदि आदेश का पालन नहीं हुआ है तो अब तक जिम्मेदार अधिकारी पर क्या कार्रवाई की गई?
शिक्षक का मूल दायित्व बच्चों को पढ़ाना है। ऐसे में किसी शिक्षक को लंबे समय तक मंडल संयोजक, हॉस्टल अधीक्षक या अन्य गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों में बनाए रखना स्वयं शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।
अब विभाग को सिर्फ आदेश जारी करने के बजाय जमीन पर हुई कार्रवाई का हिसाब देना होगा। मंडल संयोजक पद पर कार्यरत शिक्षकों को कब मूल संस्था भेजा गया? हॉस्टल अधीक्षक के रूप में कार्यरत शिक्षक को कब मूल पद पर वापस भेजा गया? तीन दिन में मांगा गया पालन प्रतिवेदन किस तारीख को भेजा गया? और यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी कौन है?
क्योंकि सवाल सिर्फ मंडल संयोजक को हटाने का नहीं है सवाल यह है कि शासन का आदेश शिक्षा विभाग में चलता भी है या सिर्फ फाइलों में दबकर रह जाता है?
नोट :- इस संबंध में विभाग द्वारा आदेश के पालन प्रतिवेदन एवं वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि हेतु विभागीय अधिकारियों से संपर्क का प्रयास किया जा रहा है, पक्ष प्राप्त होते ही प्रकाशित किया जाएगा।
आदेश…👉

शासन के आदेश के बाद भी मंडल संयोजक, हॉस्टल अधीक्षक क्यों नहीं हटे ?

क्राइम न्यूज़

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