भास्कर में तालाब गहरीकरण से बदली तस्वीर, समय पर धान की रोपाई के साथ ग्रामीणों को गांव में ही मिला रोजगार
सूरजपुर- बारिश की बूंदों का इंतजार करते किसान, सूखे पड़े खेत और समय पर रोपा न लग पाने की चिंता, बस्कर गांव के किसानों के लिए मानसून का यह इंतजार कभी-कभी बेचैनी में बदल जाता था। खेत तैयार रहते थे, लेकिन पानी की कमी उनकी उम्मीदों पर भारी पड़ती थी। कई बार रोपाई का समय निकलने लगता और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार करते रह जाते थे। लेकिन इस बार गांव की तस्वीर कुछ अलग है। तालाब पानी से लबालब है, खेतों में धान का रोपा लहरा रहा है और किसानों के चेहरों पर चिंता की जगह संतोष दिखाई दे रहा है। यह बदलाव केवल एक तालाब के गहरीकरण का परिणाम नहीं, बल्कि पानी के साथ गांव की उम्मीदों के लौटने की कहानी है।
आज बस्कर का यही तालाब गांव के लिए पानी का भंडार ही नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीद, मजदूरों के रोजगार और आने वाले बेहतर कल की नींव बनकर उभरा है।
जनपद पंचायत भैयाथान क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बस्कर में कलेक्टर रेना जमील के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ विजेंद्र सिंह पाटले के निर्देश पर विकसित भारत जी रामजी योजना के तहत तालाब गहरीकरण का कार्य कराया गया। गहरीकरण के बाद तालाब में वर्षा जल का बेहतर संचय हुआ और इस मानसून में तालाब पानी से भर गया। आसपास के खेतों तक पहुंचे इसी पानी ने किसानों की सबसे बड़ी चिंता दूर कर दी।
किसानों के लिए यह सिर्फ पानी नहीं, बल्कि समय पर खेती शुरू करने का भरोसा है। ग्रामीण बताते हैं कि पहले पानी की कमी के कारण धान की रोपाई में देरी हो जाती थी। इस वर्ष तालाब में पर्याप्त पानी होने से समय पर रोपा लगाया जा सका। अब किसानों को उम्मीद है कि तालाब में पानी लंबे समय तक ठहरेगा और रबी सीजन में गेहूं, सरसों तथा विभिन्न सब्जियों की खेती कर वे दोहरी फसल ले सकेंगे।
रोजगार मिला तो गांव में ही थमी कदमों की दूरी :-
तालाब गहरीकरण ने ग्रामीणों को सिर्फ पानी ही नहीं दिया, बल्कि उनके हाथों को काम भी दिया। योजना के तहत ग्रामीणों को 111 दिनों का रोजगार मिला। कभी रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर बाहर जाने को मजबूर होने वाले मजदूरों के लिए गांव में ही काम मिलना राहत की बात है। ग्रामीण कहते हैं कि पहले जब गांव में काम नहीं मिलता था तो परिवार और घर-बार छोड़कर दूसरे स्थानों पर मजदूरी के लिए जाना पड़ता था। अब स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से अपने गांव में रहकर ही काम करने का अवसर मिल रहा है। एक ओर तालाब में पानी जमा हुआ, दूसरी ओर मेहनतकश हाथों को काम मिला—यही इस योजना का ग्रामीण जीवन पर दिखाई देने वाला दोहरा प्रभाव है।



























