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दिल्ली में महिला पत्रकारों पर कथित पुलिसिया बर्बरता से गरमाया माहौल, मोहन प्रताप सिंह ने जताया तीखा विरोध

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नाम और धर्म’ को लेकर लगाए गए आरोपों ने खड़े किए गंभीर सवाल, दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

सूरजपुर- देश की राजधानी दिल्ली में 4 पीएम न्यूज चैनल की दो महिला पत्रकारों शाहीन खान और उनकी सहयोगी नफीसा खान के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई बर्बरता और अमानवीय व्यवहार को लेकर सांध्य रिहंद टाइम्स, दैनिक रुद्रपथ एवं दैनिक राजधानी से जनता तक के जिला संवाददाता, सूरजपुर मोहन प्रताप सिंह ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र, संविधान और स्वतंत्र पत्रकारिता की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली घटना बताया है।

मोहन प्रताप सिंह ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और उनका दायित्व जनता की आवाज को सामने लाना तथा शासन-प्रशासन से सवाल करना है। ऐसे में समाचार कवरेज करने गई महिला पत्रकारों के साथ पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारों को ही अपनी जिम्मेदारी निभाने के दौरान पुलिसिया कार्रवाई का भय सताने लगे, तो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के अस्तित्व पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि पुलिस का काम कानून की रक्षा करना और नागरिकों को सुरक्षा देना है, न कि कानून के नाम पर कथित तौर पर किसी के अधिकारों का हनन करना। महिला पत्रकारों को पकड़कर थाने ले जाने और वहां कथित मारपीट किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

मोहन प्रताप सिंह ने विशेष रूप से पीड़ित पत्रकार शाहीन खान द्वारा लगाए गए उन आरोपों को गंभीर बताया, जिनमें उनके नाम और धर्म को लेकर कथित टिप्पणी किए जाने तथा इसके बाद उनके साथ और अधिक बर्बरता किए जाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में इस प्रकार के आरोप सही साबित होते हैं तो यह कानून के राज और संवैधानिक मूल्यों के लिए बेहद गंभीर विषय होगा। कानून की नजर में प्रत्येक नागरिक समान है और किसी व्यक्ति के नाम, धर्म, जाति या पहचान के आधार पर भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पत्रकार सवाल पूछता है, सत्ता की चापलूसी नहीं करता। यदि पत्रकारों की आवाज को दबाने के लिए पुलिसिया शक्ति का कथित इस्तेमाल किया जाएगा, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी जरूरत है।

मोहन प्रताप सिंह ने दिल्ली पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोप जांच में सत्य पाए जाते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी पत्रकार अथवा आम नागरिक के साथ ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने दो टूक कहा कि लोकतंत्र में पुलिस की ताकत नागरिकों को डराने के लिए नहीं, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए होनी चाहिए। पत्रकारों की आवाज दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

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