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मुख्यमंत्री से मंत्री तक पहुंचा रेडी-टू-ईट का घमासान! कलेक्टर के निर्देश के बाद भी कार्रवाई पर सवाल, अब प्रतापपुर की पूरी व्यवस्था की होगी उच्चस्तरीय जांच?

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कलेक्टर-एसडीएम के सामने ग्रामीणों का आर-पार का ऐलान! स्थानीय जांच से असंतोष, नमूने से भुगतान तक जांच की मांग, कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

सूरजपुर/प्रतापपुर- गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और मासूम बच्चों को दिए जाने वाले रेडी-टू-ईट की गुणवत्ता को लेकर प्रतापपुर विकासखंड में उठी शिकायत अब बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है। करसी-मकनपुर से शुरू हुआ विवाद अब पूरे विकासखंड की पोषण आहार व्यवस्था की स्वतंत्र जांच की मांग तक पहुंच गया है। मामले में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने मुख्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री, कलेक्टर और एसडीएम को हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपकर स्थानीय जांच पर असंतोष जताया है। जनपद सदस्य राजू सिंह आयाम के नेतृत्व में सरपंच गोरगी, सरपंच पकनी, सरपंच मानी, अनिता सहित कई जनपद क्षेत्र के बीडीसी तथा ग्रामीण करमेन, सरिता, मीनू, नूतन, यशोदा, राजकुमार, राहुल, घूरन पैकरा, संजय कुमार, नधू राम, देवनाथ, झरी राम, राजेन्द्र सहित दो दर्जन से अधिक लोगों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

मामले में सबसे तीखा सवाल यही है कि जब शिकायत उसी व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठा रही है, तो उसी स्थानीय तंत्र से जांच क्यों कराई जा रही है?

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कलेक्टर के निर्देश के बाद स्थानीय स्तर पर टीम मौके पर पहुंची और सामग्री के नमूने लिए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन जांच की निष्पक्षता को लेकर ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उनका आरोप है कि केवल मौके पर पहुंचकर बयान दर्ज कर लेना और कुछ पैकेट ले लेना पर्याप्त नहीं है। असली जांच तो उत्पादन केंद्र से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र तक पूरी आपूर्ति व्यवस्था की होनी चाहिए।

मामला सिर्फ एक गांव के कुछ पैकेटों का नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक स्थान पर रेडी-टू-ईट की गुणवत्ता पर गंभीर शिकायत सामने आई है तो यह पता लगाना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उसी उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े पूरे प्रतापपुर विकासखंड में हितग्राहियों को आखिर क्या सामग्री पहुंचाई जा रही है। इसलिए केवल करसी-मकनपुर तक जांच सीमित करने को वे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

कागजों की जांच नहीं, जमीन पर उतरेगी जांच! रिकॉर्ड से उत्पादन तक खुलेगा हिसाब, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन में मांग की गई है कि प्रतापपुर विकासखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों से रेडी-टू-ईट के नमूने लिए जाएं और उन्हें विधिवत सीलबंद कर अधिकृत प्रयोगशाला में वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा जाए। नमूना लेने से लेकर सील करने और प्रयोगशाला भेजने तक की प्रक्रिया में शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि बाद में जांच की पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे।

ग्रामीणों ने जांच का दायरा भी स्पष्ट कर दिया है। उत्पादन केंद्रों का औचक भौतिक सत्यापन, कच्चे माल की खरीद, मशीनरी, श्रमिक, उत्पादन क्षमता, स्टॉक, पैकिंग और वितरण व्यवस्था की जांच की मांग है। उत्पादन रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और हितग्राही सूची का मौके पर मिलान कराने के साथ कागजों में दर्ज उत्पादन और वास्तविक उत्पादन की मात्रा की भी जांच की मांग उठी है।

इसके अलावा समूहों के चयन और पात्रता, कार्य आवंटन, खरीद प्रक्रिया, बिल-वाउचर, भुगतान अभिलेख, बैंक रिकॉर्ड, परिवहन व्यवस्था तथा गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है। बाहर से तैयार सामग्री लाकर स्थानीय स्तर पर पैकिंग अथवा वितरण किए जाने संबंधी शिकायतों की भी जांच की मांग ज्ञापन में की गई है। ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी है कि जांच पूरी होने तक उत्पादन, स्टॉक, वितरण, भुगतान, बैंक, परिवहन और नमूना परीक्षण से जुड़े सभी अभिलेख सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए जाएं।

सबसे गंभीर सवाल कार्रवाई को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद काफी समय बीत चुका है, मामला मीडिया में कई बार उठ चुका है और कलेक्टर के निर्देश के बाद जांच भी हो चुकी है, फिर भी ठोस और निर्णायक कार्रवाई सामने क्यों नहीं आई? यदि जांच में सामग्री गुणवत्तापूर्ण है तो वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने लाई जाए और यदि गुणवत्ता में गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने में देरी क्यों?

ग्रामीणों ने साफ किया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं है। वे केवल स्वतंत्र और वैज्ञानिक जांच चाहते हैं। लेकिन यदि जांच में सामग्री मानकविहीन, अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो संबंधित समूह, उत्पादक, सप्लायर और जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि मामले को फिर लंबित रखा गया, स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच शुरू नहीं हुई और समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण एवं आवेदक एसडीएम कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन सहित व्यापक जनआंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

अब गेंद पूरी तरह प्रशासन के पाले में है। क्या रेडी-टू-ईट की पूरी आपूर्ति व्यवस्था की निष्पक्ष जांच होगी? क्या नमूनों की वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आएगी? क्या पुराने रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे? और सबसे बड़ा सवाल—यदि गड़बड़ी प्रमाणित हुई तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होगी या मामला फिर फाइलों में दब जाएगा?

बच्चों और माताओं के पोषण से जुड़े इस मामले में अब ग्रामीण जवाब नहीं, कार्रवाई मांग रहे हैं।

इस विषय में एसडीएम ललिता भगत ने कहा कि संबंधित मामले में आवेदन प्राप्त हुआ है जिले के अधिकारी सहित संबंधित को ज्ञापन भेजी जाएगी और कड़ी जांच कार्यवाही की जाएगी।

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