तीज-त्योहारों में भी अंधेरे में डूबे रहे गांव, बार-बार परमिट और तकनीकी खराबी का हवाला
सूरजपुर- विद्युत विभाग द्वारा मेंटेनेंस और लाइन सुधार के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के दावों की धरातल पर हवा निकल रही है। सूरजपुर जिले के अंतर्गत देवनगर विद्युत वितरण केंद्र से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की लचर व्यवस्था से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। न तो तेज आंधी है और न ही मूसलाधार बारिश, इसके बावजूद दिन में 10 से 15 बार ट्रिपिंग और घंटों अघोषित बिजली कटौती होना आम दिनचर्या बन चुकी है।
त्योहारों में भी पसरा रहा अंधेरा, उपभोक्ता आक्रोशित
ग्रामीणों का कहना है कि श्री गणेश चतुर्थी और हरितालिका तीज जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान भी विद्युत विभाग सुचारू आपूर्ति देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। जब घरों और सार्वजनिक पंडालों में पूजा-अर्चना चल रही थी, तब जूर और भवराही फीडर में लगातार बिजली गुल रहने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उपभोक्ताओं ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है मानो विभाग त्योहारों के समय ही विशेष कटौती की योजना तैयार करता है।
दिनभर परमिट का खेल, व्हाट्सएप ग्रुप में ट्रिपिंग की भरमार
बिजली विभाग के सब-स्टेशन ग्रुप से सामने आई जानकारियों के अनुसार, जूर, भवराही और कलुआ फीडर में दिनभर केवल परमिट लेने और चालू करने का सिलसिला चलता रहता है। कभी 10 से 15 मिनट के अंतराल में परमिट लिया जाता है तो कभी मिनटों में लाइन ट्रिप होने के संदेश आते रहते हैं। स्थिति यह है कि एक घंटे भी उपभोक्ताओं को बिना रुकावट बिजली नहीं मिल पा रही है। दिनभर में कभी 4 घंटे तो कभी पूरे दिन के लिए आपूर्ति ठप कर दी जाती है।
शिकायतों पर रटा-रटाया जवाब, फोन उठाने से बचते हैं जिम्मेदार
उपभोक्ताओं का आरोप है कि बार-बार बत्ती गुल होने पर जब वे संबंधित कनिष्ठ यंत्री (जेई) या कार्यालय में संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तो अक्सर फोन उठाया ही नहीं जाता। यदि कभी संपर्क हो भी जाए, तो ‘लाइनमैन को भेजा है, देख रहे हैं’ कहकर खानापूर्ति कर दी जाती है। मेंटेनेंस के नाम पर बजट खपाए जाने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है।
स्थायी समाधान की मांग
बार-बार की ट्रिपिंग से जहां घरों में लगे महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो रहे हैं, वहीं पेयजल आपूर्ति और छोटे व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि देवनगर वितरण केंद्र अंतर्गत भवराही व जूर फीडर की तकनीकी खामियों की जांच कराई जाए और अघोषित कटौती पर रोक लगाकर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।