अभय नारायण पांडेय ने सरगुजा रेंज पुलिस महानिरीक्षक को सौंपा शिकायती ज्ञापन, वर्ष 2015 से 2018 के फेसबुक पोस्ट्स के आधार पर हथियारों के स्रोत, लाइसेंस व विधिक स्थिति की जांच का आग्रह
अंबिकापुर (छत्तीसगढ़)। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर सरगुजा संभाग मुख्यालय में सोशल मीडिया पर हथियारों के कथित प्रदर्शन को लेकर मामला पुलिस प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। अंबिकापुर निवासी समाजसेवी अभय नारायण पांडेय ने पुलिस महानिरीक्षक (IG), सरगुजा रेंज को औपचारिक शिकायती आवेदन सौंपकर अधिवक्ता संजय अंबष्ट के फेसबुक खाते पर उपलब्ध कई वर्ष पुरानी तस्वीरों की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में सोशल मीडिया पर उपलब्ध डिजिटल सामग्री की सत्यता परखने और नियमानुसार वैधानिक कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
शिकायत में प्रस्तुत किए गए प्रमुख बिंदु: आईजी कार्यालय में दर्ज आवेदन के अनुसार, फेसबुक प्रोफाइल पर वर्ष 2015 से 2018 के दौरान साझा की गई तस्वीरों का ब्योरा देते हुए तकनीकी व वैधानिक जांच की मांग रखी गई है:
स्वचालित हथियार जैसी संरचना (05 जनवरी 2015): शिकायत में उल्लेख है कि न्यू बस स्टैंड अंबिकापुर की लोकेशन के साथ अपलोड की गई तस्वीर में एक स्वचालित राइफल (एके-पैटर्न) और उसके नीचे अटैचमेंट (UBGL जैसी संरचना) दिखाई दे रही है। शिकायतकर्ता ने बैलिस्टिक विशेषज्ञ से इसकी वास्तविक प्रकृति की पहचान कराने तथा स्रोत अथवा शासकीय शस्त्रागार से किसी संभावित संबंध के सत्यापन का आग्रह किया है।
हैंडगन व स्कोप वाली राइफल: 21 फरवरी 2015 को हैंडगन/पिस्टल जैसी वस्तु और 25 जून 2017 को स्कोप लगी राइफल से जुड़ी तस्वीरों के स्वामित्व, स्रोत व लाइसेंस के परीक्षण की मांग की गई है।
परिवार के सदस्य की तस्वीरें: 7 अक्टूबर 2015 और 28 जुलाई 2018 की तस्वीरों का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इनमें परिवार के अल्पवयस्क सदस्य के हाथ में लंबे फायरआर्म व धारदार वस्तु की मौजूदगी दिख रही है, जिसकी आर्म्स एक्ट एवं तत्कालीन जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के विधिक प्रावधानों के तहत जांच की जानी चाहिए।
डिजिटल साक्ष्य विवेचना में सौंपने की बात आवेदन में शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि संबंधित फेसबुक पोस्ट्स और तस्वीरों से जुड़े आवश्यक डिजिटल साक्ष्य व मेटाडेटा सुरक्षित कर लिए गए हैं, जिन्हें विवेचना अधिकारी को सौंपा जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मंगाकर पोस्ट की प्रामाणिकता, दिनांक और समय का सत्यापन कराने का अनुरोध भी किया गया है।
प्रशासनिक कदम की प्रतीक्षा आईजी कार्यालय में 2 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक आवक दर्ज होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में पुलिस प्रशासन द्वारा जांच के संबंध में क्या निर्देश जारी किए जाते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस मामले में संबंधित पक्ष अथवा पुलिस प्रशासन का कोई भी अधिकृत स्पष्टीकरण या जांच रिपोर्ट सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।