प्रसूता का आरोप—दो माह बाद भी नहीं मिला योजना का लाभ, अस्पताल स्तर पर प्रक्रिया में लापरवाही का आरोप, प्रशासन से त्वरित भुगतान व जांच की मांग
सूरजपुर/प्रतापपुर- शासन द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और जच्चा-बच्चा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित जननी सुरक्षा योजना (JSY) के क्रियान्वयन में निचले स्तर पर विभागीय ढिलाई के मामले सामने आ रहे हैं। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) सिलौटा में प्रसव कराने के बावजूद शासन द्वारा निर्धारित प्रोत्साहन राशि का भुगतान न होने का मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) तक पहुंच गया है।
प्रसव के हफ्तों बाद भी भुगतान की प्रतीक्षा
सीएम हेल्पलाइन में दर्ज आधिकारिक शिकायत (टोकन नंबर: WP260900176682) के अनुसार, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के राजपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम भेंडी निवासी हितग्राही गायत्री यादव ने बताया कि 3 अगस्त 2026 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिलौटा में उनका संस्थागत प्रसव कराया गया था। प्रसव के पश्चात नियमानुसार जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता राशि का भुगतान सीधे हितग्राही के खाते में समय पर हो जाना चाहिए था, परंतु लंबा समय बीत जाने के बाद भी राशि खाते में नहीं पहुंची।
अस्पताल स्तर पर कागजी औपचारिकता का पेंच
शिकायत विवरण में आरोप लगाया गया है कि जब हितग्राही पक्ष ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिलौटा पहुंचकर स्टाफ से योजना के भुगतान के संबंध में जानकारी चाही, तो संतोषजनक समाधान के बजाय यह कहा गया कि ‘योजना का फॉर्म किसी ने मांगा ही नहीं है, जब कोई फॉर्म मांगेगा तब राशि आएगी’। इस प्रकार के जवाब से आहत होकर हितग्राही ने मामले की शिकायत सीधे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई है।
सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर उठते सवाल
संस्थागत प्रसव के दौरान अस्पताल प्रबंधन की यह जिम्मेदारी होती है कि वे भर्ती के समय ही जच्चा-बच्चा कार्ड, बैंक खाता और आवश्यक दस्तावेजों का संकलन कर पोर्टल पर ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करें, ताकि डिस्चार्ज के तुरंत बाद अथवा तय समय-सीमा में डीबीटी (DBT) के माध्यम से प्रोत्साहन राशि पहुंच सके। निचले स्तर के अस्पतालों में इस प्रकार की प्रक्रियात्मक लापरवाही से दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों की प्रसूताओं को आर्थिक सहायता के लिए परेशान होना पड़ता है। शिकायतकर्ता ने सक्षम अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नियमानुसार लंबित राशि का अविलंब भुगतान कराने की मांग की है।
विभागीय पक्ष जानने का प्रयास
इस पूरे मामले में विकासखंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) प्रतापपुर का पक्ष जानने के लिए उनके दूरभाष नंबर पर दो बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया। स्वास्थ्य विभाग अथवा बीएमओ कार्यालय से इस संदर्भ में कोई भी आधिकारिक वक्तव्य या पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।