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कलेक्टर ने बोया शब्दबीज, सूर्याेदय सूरजपुर के साथ शिक्षा में नवाचार की नई सुबह

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कलेक्ट्रेट परिसर में किया गया शब्दबीज नवाचार का प्रेरक शुभारंभ

बच्चों की शब्द-संपदा और अभिव्यक्ति क्षमता को नई दिशा देने की अनूठी पहल

सूरजपुर- किसी पौधे का बीज मिट्टी में बोया जाता है और समय के साथ वह वृक्ष बनकर फल देता है, लेकिन सूरजपुर में अब शब्दों के बीज बोकर बच्चों के ज्ञान, विचार और अभिव्यक्ति का वृक्ष तैयार करने की पहल शुरू हुई है। इसी अभिनव सोच को साकार करते हुए कलेक्टर रेना जमील ने कलेक्ट्रेट परिसर में शब्दबीज नवाचार को केंद्र में रखते हुए प्रतीकात्मक रूप से शब्दबीज बोया।

कलेक्टर द्वारा शब्दबीज बोने का यह दृश्य केवल एक औपचारिक गतिविधि नहीं, बल्कि जिले की प्राथमिक शिक्षा में भाषा और सीखने की संस्कृति को मजबूत करने के संकल्प का प्रतीक बन गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बच्चे जितने अधिक शब्दों से परिचित होंगे, उतनी ही बेहतर उनकी सोच, संवाद और अभिव्यक्ति विकसित होगी। शब्दबीज बच्चों को केवल नए शब्द सिखाने की गतिविधि नहीं, बल्कि उन्हें शब्द से संवाद, संवाद से विचार और विचार से अभिव्यक्ति की ओर ले जाने का प्रयास है।

जिला प्रशासन एवं समग्र शिक्षा सूरजपुर की पहल से संचालित शब्दबीज नवाचार का मूल मंत्र है, एक शब्द प्रतिदिन, ज्ञान का वृक्ष जीवनभर।

इस नवाचार के माध्यम से कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों में शब्द-संपदा, भाषा कौशल, संवाद क्षमता, पठन, लेखन, समझ तथा अभिव्यक्ति क्षमता विकसित करने को प्राथमिकता दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को कठिन शब्दों का बोझ देना नहीं, बल्कि उनके आसपास के जीवन, परिवेश और अनुभवों से जुड़े शब्दों को सीखने और उनका व्यवहारिक प्रयोग करने का अवसर देना है। शब्दबीज की सीखने की प्रक्रिया सुनेगा, बोलेगा, पढ़ेगा, लिखेगा, समझेगा,वाक्य बनाएगा और जीवन में प्रयोग करेगा के क्रम पर आधारित है।

कलेक्ट्रेट परिसर बना शब्दबीज के संकल्प का साक्षी

कलेक्ट्रेट परिसर में कलेक्टर रेना जमील द्वारा शब्दबीज बोने की पहल ने नवाचार को एक भावनात्मक और प्रतीकात्मक पहचान दी। जिस प्रकार एक छोटा-सा बीज भविष्य में विशाल वृक्ष का रूप लेता है, उसी प्रकार प्रतिदिन सीखा गया एक नया शब्द बच्चे के व्यक्तित्व में ज्ञान, विचार और आत्मविश्वास का विस्तार कर सकता है। इस अवसर पर शब्दबीज की अवधारणा, उद्देश्य एवं इसके क्रियान्वयन की जानकारी भी साझा की गई। नवाचार को जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालयों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए शिक्षकों को बच्चों के साथ नियमित शब्द-अभ्यास, संवाद एवं गतिविधि आधारित शिक्षण से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

शब्द नहीं, भविष्य की नींव तैयार करेगा शब्दबीज

शब्दबीज की खासियत यह है कि इसमें शब्द केवल याद कराने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन में उतारने के लिए दिए जाएंगे। एक शब्द से उसका अर्थ, उच्चारण, प्रयोग, वाक्य निर्माण और व्यवहारिक संदर्भ जोड़ा जाएगा। इस तरह शब्द सीखने की प्रक्रिया धीरे-धीरे बच्चों की भाषा, सोच और आत्मविश्वास को मजबूत करेगी।

सूर्याेदय सूरजपुर – हर बच्चे की सीख का उजाला

इस अवसर पर सूर्याेदय सूरजपुर कार्ययोजना पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। सूरजपुर में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देने की दिशा में सूर्याेदय सूरजपुर एक और नवाचारी पहल है, जो विद्यालयों को केवल पढ़ाने की जगह नहीं, बल्कि बच्चों की वास्तविक सीख और क्षमताओं के विकास का केंद्र बनाने की परिकल्पना करती है। इसका फोकस केवल परीक्षा परिणाम बढ़ाने पर नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर है कि हर बच्चा अपनी कक्षा के अनुरूप पढ़ सके, समझ सके, गणना कर सके, सोच सके, सवाल कर सके, समस्या सुलझा सके और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख सके।

सूर्याेदय सूरजपुर में शिक्षक की भूमिका, बच्चे की सीख और विद्यालय की कार्यसंस्कृति,तीनों को एक साथ मजबूत करने का प्रयास है। गतिविधि आधारित शिक्षण, नवाचार, सतत मूल्यांकन और सीखने के परिणामों पर केंद्रित यह पहल जिले के प्रत्येक विद्यालय में गुणवत्ता, जवाबदेही और नवाचार की संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है,क्योंकि शिक्षा का असली सूर्याेदय तब होगा, जब हर बच्चे की प्रतिभा में उजाला दिखाई देगा।

क्राइम न्यूज़

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