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108 संजीवनी एक्सप्रेस ने बचाई 29 दिन के नवजात की जान: वेंटिलेटर सपोर्ट और रास्ते भर सीपीआर देते हुए सूरजपुर से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज पहुँचाया

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सूरजपुर/अंबिकापुर- संजीवनी 108 एम्बुलेंस सेवा के आपातकालीन स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी त्वरित कार्यशैली और चिकित्सकीय सूझबूझ से एक बार फिर जीवनरक्षा की मिसाल पेश की है। सूरजपुर जिला अस्पताल से अत्यंत गंभीर स्थिति में रेफर किए गए महज 29 दिन के नवजात शिशु को 108 की टीम ने पूरे रास्ते आवश्यक लाइफ सपोर्ट देते हुए सुरक्षित मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर पहुंचाया।

जानकारी के अनुसार, इंद्रकुंवर के 29 दिवसीय नवजात को दौरे आने और सांस लेने में भारी तकलीफ होने के चलते सूरजपुर अस्पताल लाया गया था। शिशु की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल उच्च स्तरीय उपचार के लिए अंबिकापुर रेफर करने का निर्णय लिया।

सूचना मिलते ही 108 एम्बुलेंस टीम मौके पर पहुंची। एम्बुलेंस में तैनात ईएमटी संतोष कुमार सिंह और पायलट फिरोज अंसारी ने मोर्चा संभाला। रास्ते में शिशु की स्थिति अत्यधिक गंभीर होने पर ईआरसीपी डॉ. जितेंद्र के ऑनलाइन चिकित्सकीय मार्गदर्शन में नवजात को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया तथा पूरे सफर के दौरान सीपीआर व सक्शन की प्रक्रिया निरंतर जारी रखी गई।

पायलट फिरोज अंसारी की सूझबूझ और नियंत्रित ड्राइविंग की मदद से गंभीर मरीज को बिना किसी देरी के सुरक्षित मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर पहुंचाया गया, जहां उसे तुरंत गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। समय पर मिले इस जीवनरक्षक सहयोग के लिए परिजनों ने 108 एम्बुलेंस स्टाफ और चिकित्सकीय टीम के प्रति आभार व्यक्त किया है।

इस उत्कृष्ट और सराहनीय कार्य पर ईएमई (EME) राकेश सूर्यवंशी (सरगुजा) एवं प्रोग्राम मैनेजर (PM) शैलेश इंदौरिया ने पूरी टीम की तत्परता की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। अधिकारियों ने कहा कि आपातकालीन स्थिति में समर्पित भाव से कार्य करते हुए मरीज की जान बचाना ही 108 सेवा का मूल ध्येय है।

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