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प्राथमिक-मिडिल मिलाकर मात्र 39 बच्चे: 21 लाख के 6 शौचालय खंडहर, अब 4.50 लाख के नए निर्माण का खेल, 20-30 मीटर दूर खड़ा सामुदायिक शौचालय भी बेकार, नया बोर धंसा

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परिसर में 6 शिक्षक पदस्थ, मात्र 21 छात्राओं के लिए खड़ा हो रहा सातवां ढांचा, समय पर हैंडपंप न लगने से बोर भठरा, सामान स्कूल में डंप, रसोइया के घर से आ रहा पानी, सवालों पर तकनीकी व शिक्षा विभाग की खुली पोल

सूरजपुर/भैयाथान- विकासखंड भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत डबरीपारा के खुटरापारा स्कूल परिसर में शासकीय बजट के बेतुके इस्तेमाल और निर्माण एजेंसियों की मनमानी का गंभीर मामला सामने आया है। अब तक जहां विभिन्न माध्यमों से इस विद्यालय परिसर में करीब 45 छात्र होने का अनुमान लगाया जा रहा था, वहीं आधिकारिक विभागीय रिकॉर्ड की पड़ताल में स्थिति बिल्कुल उलट निकली है।

एक ही चारदीवारी के संयुक्त प्रांगण में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला और शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला को मिलाकर कक्षा पहली से आठवीं तक कुल दर्ज छात्र संख्या मात्र 39 है। प्राथमिक शाला में 10 बालक व 14 बालिकाएं (कुल 24 छात्र, 2 शिक्षक) तथा मिडिल स्कूल में 8 बालक व 7 बालिकाएं (कुल 15 छात्र, 4 शिक्षक) पदस्थ हैं। यानी पूरे परिसर में 6 शिक्षकों की देखरेख में मात्र 39 नौनिहाल अध्ययनरत हैं। ग्राम पंचायत डबरीपारा की कुल आबादी के अनुपात में इस स्कूल परिसर में निर्माण कार्यों की बाढ़ ला दी गई है, लेकिन धरातल पर बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रही हैं।

महज 20 से 30 मीटर की दूरी पर खड़ा है सामुदायिक शौचालय, फिर भी उपयोग शून्य

परिसर के भौतिक स्थल निरीक्षण में यह गंभीर विसंगति सामने आई है कि स्कूल के मुख्य कमरों से महज 20 से 30 मीटर की दूरी पर पूरे ग्राम पंचायत के लिए स्वीकृत सामुदायिक सार्वजनिक शौचालय भी स्कूल परिसर में ही निर्मित कर दिया गया है। कायदे से सार्वजनिक शौचालय गांव के खुले चौक या बाजार स्थल पर होना चाहिए ताकि आम ग्रामीण उसका उपयोग कर सकें। लेकिन इसे स्कूल परिसर में ही केवल 20-30 मीटर पास बनाकर बंद कर दिया गया है। नतीजतन, न तो ग्रामीण इसका लाभ उठा पा रहे हैं और न ही स्कूल के बच्चे इसका उपयोग कर पा रहे हैं।

जनवरी में हुआ नया बोर धंसा, समय पर हैंडपंप न लगने से भठरा

स्कूल परिसर में पानी के नाम पर सरकारी खजाने के दुरुपयोग की बानगी इस बात से उजागर होती है कि जनवरी 2026 में परिसर के भीतर एक नया बोरवेल खुदवाया गया था। लेकिन संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते बोर खनन के बाद समय पर हैंडपंप या मोटर पंप की स्थापना नहीं की गई। लंबे समय तक खुला छूट जाने के कारण यह नया बोर भठर कर बंद हो गया।

हैरानी की बात यह है कि बोरवेल में लगने वाला सामान और उपकरण बाद में आकर स्कूल भवन में ही डंप कर दिया गया, जो आज भी कमरों में धूल फांक रहा है। यदि समय रहते हैंडपंप स्थापित कर दिया जाता, तो नया बोर बेकार न होता। आज स्थिति यह है कि नौनिहालों और शिक्षकों के लिए पीने का पानी तक रसोइया के घर से बर्तनों में भरकर लाना पड़ रहा है।

मात्र 21 छात्राओं के लिए सातवें शौचालय का नया खेल

पूरे प्रांगण में दोनों स्कूलों को मिलाकर केवल 21 छात्राएं हैं। इसके बावजूद करीब 21 लाख रुपये की अनुमानित लागत से पूर्व में निर्मित 6 शौचालयों के जर्जर व बंद रहने पर उनकी सुध लेने के बजाय, अब मात्र 21 बालिकाओं के नाम पर करीब 4.50 लाख रुपये की लागत से एक और नया बालिका शौचालय स्वीकृत कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। शिक्षा के अधिकार के तय मानकों के अनुसार 39 बच्चों और 6 शिक्षकों के लिए 2 से 3 शौचालय पर्याप्त होते हैं, लेकिन यहां हर 5 से 6 बच्चों के औसत पर ढांचा खड़ा किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर योजना, मद, लागत और एजेंसी का विवरण दर्शाने वाला नागरिक सूचना पटल तक नहीं लगाया गया है।

जिम्मेदारों के बयान: किसी ने पल्ला झाड़ा, तो किसी को समस्या की खबर ही नहीं

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब दोनों विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों से मोबाइल फोन पर संपर्क साधा गया, तो उनके बयानों में भारी विरोधाभास और टालमटोल की स्थिति देखने को मिली। 

शिक्षा विभाग वालों ने प्रपोज किया है और जिला से सैंक्शन होकर आया है वह शौचालय, शिक्षा विभाग से संपर्क करें। जब पुनः संपर्क कर तकनीकी स्वीकृति व पुराने ढांचों के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा— मेरे को पहले फाइल देखने दीजिए, बिना पूरा कागज देखे वैसे नहीं बता पाऊंगा। इसके लगभग 1 घंटे बाद पुनः संपर्क करने पर उन्होंने कहा— टीएल बैठक में हूँ मैं, बिना फाइल देखे इस संबंध में कुछ नहीं कह पाऊंगा।— अमित ताम्रकार एसडीओ उपसंभाग भैयाथान

लगातार तीन बार कॉल नहीं उठाने के बाद चौथी बार में फोन रिसीव करते हुए बीईओ ने कहा— पानी की जो समस्या है उसकी जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। पुराना शौचालय तो जर्जर हो गया है, तो नया तो बनेगा ही। मांग भेजा गया था, तभी स्वीकृत हुआ है। जो नया हैंडपंप जनवरी में खनन हुआ था और फेल हो गया है, उस पर पीएचई को रिपोर्ट दे देंगे और उसमें कार्यवाही करवाएंगे।— फूलसाय मरावी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी भैयाथान

प्रशासनिक जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

एक तरफ शिक्षा विभाग मांग भेजने का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है, तो दूसरी तरफ तकनीकी शाखा फाइलों और बैठकों की आड़ में मौन साधे हुए है। न तो परिसर में नौनिहालों के लिए पेयजल की सुचारू व्यवस्था है और न ही महज 20-30 मीटर दूर खड़े सामुदायिक शौचालय के बंद रहने का कोई ठोस जवाब जिम्मेदारों के पास है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर पूर्व निर्मित ढांचों, भठरे बोरवेल और वर्तमान में स्वीकृत नए निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराएगा? जागरूक ग्रामीणों और अभिभावकों ने कलेक्टर सूरजपुर से मांग की है कि मौके पर जांच दल भेजकर भौतिक सत्यापन कराया जाए और शासकीय राशि के दुरुपयोग के जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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