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दावों के बीच वेंटिलेटर पर गंगौटी का आयुष्मान आरोग्य मंदिर: 3282 ग्रामीणों के बीच न डॉक्टर पर्ची, न दवा, खाली हाथ लौट रहे बीमार

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टीकाकरण के बाद बफर स्टॉक शून्य होने का दावा, 5 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की तैयारी में सीएचओ, स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग पर उठे गंभीर सवाल

सूरजपुर/भैयाथान— राज्य शासन द्वारा सुदूर वनांचल व ग्रामीण अंचलों के अंतिम व्यक्ति तक सुलभ व गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक उपचार पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे भैयाथान विकासखंड के ग्राम गंगौटी में पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। क्षेत्र का ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही, जिम्मेदारों की उदासीनता और लचर प्रशासनिक तालमेल के चलते खुद ही बदहाली और अव्यवस्था के दौर से गुजर रहा है। जमीनी पड़ताल में यह कड़वी हकीकत सामने आई है कि केंद्र में सामान्य मौसमी बीमारियों से लेकर जीवनरक्षक आवश्यक दवाओं का अकाल पड़ा हुआ है। प्राथमिक उपचार के लिए पहुंचने वाले ग्रामीण मरीजों को दवा मिलना तो दूर, परामर्श पर्ची तक नसीब नहीं हो रही है।

3282 आबादी का एकमात्र सहारा

पंचायती राज और शासकीय अभिलेखों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आयुष्मान आरोग्य मंदिर के सीधे कार्यक्षेत्र और प्रभाव में ग्राम पंचायत गंगौटी सहित निकटवर्ती ग्राम पंचायत डबरीपारा के आश्रित टोले आते हैं। इसमें ग्राम गंगौटी की 1809, ग्राम डबरीपारा की 1045 तथा खुटारापारा की 428 की आबादी शामिल है। यानी कुल 3282 से अधिक की ग्रामीण आबादी प्राथमिक स्वास्थ्य सुरक्षा, प्रसव पूर्व जांच, शिशु टीकाकरण और नियमित एनसीडी (बीपी-शुगर) जांच के लिए इसी एकमात्र केंद्र के भरोसे निर्भर है। लेकिन दवाओं के अभाव और कर्मचारियों की मनमानी के चलते ग्रामीणों को सामान्य बुखार, दर्द या उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों के लिए भी मीलों दूर झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर काटने या निजी मेडिकल स्टोर्स से जेब ढीली करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

पर्ची नहीं, सिर्फ रजिस्टर में एंट्री

केंद्र में इलाज कराने पहुंचे स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब भी वे अस्पताल पहुंचते हैं, वहां दवाएं उपलब्ध नहीं मिलतीं। हद तो यह है कि शासन के स्पष्ट निर्देश के बावजूद मरीजों को दवा या जांच की कोई आधिकारिक डॉक्टर पर्ची नहीं दी जाती। कर्मचारी केवल एक रजिस्टर में मरीज का नाम व पता लिखकर खानापूर्ति कर लेते हैं और दवा खत्म होने की बात कहकर उन्हें बैरंग लौटा दिया जाता है। इस प्रकार की कार्यशैली से यह संदेह भी गहराता है कि कागजों पर वितरण दिखाकर जमीनी स्तर पर दवाओं का खेल तो नहीं किया जा रहा है।

बच्चे को 15 किमी दूर ले जाने की मजबूरी

पड़ताल के दौरान केंद्र में इलाज कराने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि आज जब वे मौसमी बीमारी और बुखार के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें भारी निराशा हाथ लगी। अस्पताल पहुंचे एक 5 वर्ष के मासूम बच्चे और एक 20 वर्षीय युवक को जरूरी दवाएं तक नहीं मिल सकीं। हद तो यह रही कि किसी भी मरीज को डॉक्टर पर्ची तक नहीं दी गई, केवल रजिस्टर में नाम दर्ज करने की खानापूर्ति की गई। उपस्थित ग्रामीणों में से एक मरीज को केवल पैरासिटामोल की गोली थमा दिया गया, जबकि अन्य मरीजों को दवा का स्टॉक खत्म होने की बात कहकर सीधे बैरंग लौटा दिया गया। गांव के स्वास्थ्य केंद्र में दवा और समुचित प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण 5 साल के बीमार बच्चे के बेबस परिजनों को तत्काल राहत के लिए उसे लगभग 12 से 15 किलोमीटर दूर लेकर जाना पड़ा, तब जाकर बच्चे का इलाज संभव हो सका। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद ग्रामीणों को मीलों दूर सफर तय करने की यह मजबूरी शासन के ‘हर गांव सुलभ इलाज’ के दावों पर कड़ा तमाचा है।

मितानिनों की दवा पेटी भी खाली

ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की सबसे मजबूत जमीनी कड़ी मानी जाने वाली मितानिनों की स्थिति भी इसी केंद्र के कारण बदहाल बनी हुई है। नियम व व्यवस्था के अनुसार गांव-टोले में तैनात मितानिनों को अपनी प्राथमिक दवा किट के लिए दवाएं इसी आयुष्मान आरोग्य मंदिर गंगौटी से प्राप्त होती हैं। लेकिन जब मुख्य केंद्र में ही दवाओं का टोटा बना रहता है, तो मितानिनों को भी दवाएं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। नतीजतन, मितानिनों के पास अधिकांश समय आवश्यक दवाओं का जखीरा पूरी तरह खाली रहता है। घर-घर पहुंचकर प्राथमिक राहत देने वाली मितानिनों के पास ओआरएस पैकेट, पैरासिटामोल, बुखार व उल्टी-दस्त की जरूरी गोलियां न होने से जमीनी स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सुरक्षा पूरी तरह दम तोड़ चुकी है।

एएनएम अटैच, केंद्र में लटकता है ताला

सूत्रों एवं प्रत्यक्षदर्शियों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, शासन के नियमानुसार आयुष्मान आरोग्य मंदिर परिसर में ही कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) का नियमित निवास होना अनिवार्य है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को त्वरित उपचार मिल सके। किंतु गंगौटी केंद्र में पदस्थ सीएचओ अंजली कुशवाहा के आए दिन गायब रहने और छुट्टी पर रहने की शिकायतें आम हो चुकी हैं। वहीं केंद्र में पदस्थ दो आरएचओ (ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक) का मूल कार्य फील्ड में जाकर बच्चों-गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण और मौसमी बीमारियों का सर्वे करना है। सीएचओ की अनुपस्थिति में आरएचओ जैसे ही अपने तय दायित्वों के तहत फील्ड में निकलते हैं, अस्पताल परिसर में ताला जड़ना पड़ता है। स्थिति तब और ज्यादा बदतर हो गई जब सालों पहले इस केंद्र में पदस्थ एएनएम को स्वास्थ्य विभाग ने अन्य अस्पताल में अटैच कर दिया। नतीजा यह है कि 3200 से अधिक की आबादी का यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ और सिर्फ एक सीएचओ के भरोसे छोड़ दिया गया है।

5 नवंबर से हड़ताल पर सीएचओ

जब इस पूरे मामले पर केंद्र में पदस्थ सीएचओ अंजली कुशवाहा से सीधी बात की गई, तो उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि— शुक्रवार को गांव में नियमित टीकाकरण आयोजित था। उस दौरान हितग्राहियों और मरीजों को दवाइयां बांटी गईं, जिसके चलते वर्तमान में स्टॉक समाप्त हो गया है। केंद्र के लिए दवाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से लानी पड़ती हैं, जिसके लिए आज वे स्वयं भैयाथान जाकर नया स्टॉक लेकर आएंगी। इसके साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचाने वाला बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि आगामी 5 नवंबर से अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर ब्लॉक व जिले के सभी सीएचओ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। आज भैयाथान प्रवास के दौरान वे इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को औपचारिक सूचना भी देंगी। सीएचओ के 5 नवंबर से कार्य बहिष्कार की इस चेतावनी ने ग्रामीणों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है, क्योंकि पहले से ही एएनएम के अभाव से जूझ रहे इस केंद्र पर अब अनिश्चितकाल के लिए पूर्ण तालाबंदी का खतरा मंडराने लगा है।

बीएमओ का बयान

इस गंभीर अव्यवस्था, मितानिनों की खाली दवा पेटियों और 5 नवंबर की संभावित हड़ताल को लेकर जब विकासखंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. राकेश सिंह से संपर्क कर वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया, तो उन्होंने कहा- वहां का मांग पत्र क्या है, मैं दिखवाता हूँ। पूरे ब्लॉक में पैरासिटामोल और जरूरी दवाओं की कोई कमी नहीं है, पर्याप्त उपलब्धता है। गंगौटी केंद्र में दिखवाकर तुरंत दवाइयां भिजवा देता हूँ। रही बात 5 नवंबर से सीएचओ के हड़ताल पर जाने की, तो मुझे अभी इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

जनहित के सीधे सवाल: निष्पक्ष जांच की मांग

गंगौटी आयुष्मान आरोग्य मंदिर की यह जमीनी हकीकत स्वास्थ्य विभाग के दावों पर कड़े सवाल खड़े करती है, जिसको लेकर ग्रामीणों व प्रबुद्धजनों ने कलेक्टर व सीएमएचओ से पूरे मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग की है। सीधा सवाल उठता है कि जब ब्लॉक स्तर पर दवाओं की पर्याप्तता का दावा किया जा रहा है, तो गंगौटी केंद्र में बफर स्टॉक शून्य क्यों हुआ और क्या उच्चाधिकारी स्टॉक रजिस्टर, मांग पत्र व भौतिक सत्यापन की निष्पक्ष जांच कराएंगे? मरीजों को डॉक्टर पर्ची न देकर केवल रजिस्टर में नाम दर्ज करना क्या कागजों में दवा खपाने की अनियमितता का हिस्सा है? शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद सालों से एएनएम को किसके संरक्षण में अन्यत्र अटैच रखा गया है और इसे तत्काल निरस्त क्यों नहीं किया जा रहा? लाखों की लागत से बने केंद्र में कर्मियों के निवास व अनुपस्थिति पर निगरानी शून्य क्यों है? और सबसे बड़ा सवाल यह कि 5 नवंबर से सीएचओ के हड़ताल पर जाने की पूर्व चेतावनी के बाद क्या प्रशासन 3200 से अधिक की आबादी के लिए कोई वैकल्पिक डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था करेगा, या फिर इन तीन गांवों के ग्रामीणों को पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया जाएगा?

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