रिजवान खान की अध्यक्षता में हुआ डंगरी जलप्रपात का शैक्षिक भ्रमण
सूरजपुर – जिले के शासकीय कालिदास महाविद्यालय प्रतापपुर के विद्यार्थियों ने पर्यावरण अध्ययन के तहत बगीचा ब्लॉक स्थित ढंगरी जलप्रपात का अध्ययन भ्रमण किया। सुलेसा और पंडरापाठ गांवों के घने जंगलों में स्थित यह 100 फीट ऊँचा जलप्रपात, हरियाली और पक्षियों की मधुर चहचहाहट के बीच विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक अध्ययन स्थल साबित हुआ। करीब 70 विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने 2 किलोमीटर का कठिन ट्रेक को पार कर जलप्रपात तक पहुँचकर जैव विविधता जैसे वनस्पतियों, और पर्यावरण संतुलन का अवलोकन किया। विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने संरक्षण और सतत पर्यटन के महत्व पर जोर दिया। विद्यार्थियों ने जलप्रपात की सुंदरता को सराहा और प्राकृतिक स्थलों को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर चर्चाए की इस यात्रा ने न केवल प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाई बल्कि इको-टूरिज्म की संभावनाओं को भी उजागर किया। समूह चर्चा और स्थानीय ग्रामीणों के साथ बातचीत के बाद यह यात्रा विद्यार्थियों के लिए रोमांचक शिक्षाप्रद और यादगार बन गया विद्यार्थी रिजवान खान दीप्तेश चौबे,संजय प्रजापति,श्रेयस तिवारी,अनुराधा दीपिका सोनी शुभम जायसवाल मुख्य रूप से शैक्षिक भ्रमण को सफल बनाने में इनकी सहभागिता अहम रही
क्यों करवाया जाता है शैक्षिक भ्रमण
छात्रों को नियमित शैक्षिक भ्रमण पर ले जाया जाता है जहाँ पर छात्र खुले वातावरण में शिक्षा को अपने व्यक्तिगत अनुभवों से परिभाषित करते है शैक्षिक भ्रमण के माध्यम से छात्रों में एक अनुभूति जागृत होती है, जिससे वे भारत की विभिन्नताओं जैसे – इतिहास , विज्ञान शिष्टाचार और प्रकृति को व्यक्तिगत रूप से जान सकते है इसके अतिरिक्त छात्रों में समूह में रहने की प्रवृति , नायक बनने की क्षमता तथा आत्मविश्वास एवं भाई चारे की भावना प्रबल होती है।
भ्रमण द्वारा इतने अधिक शैक्षिक लाभ होते हैं वि सभी का आसानी से वर्णन नहीं किया जा सकता भ्रमण शिक्षा का अंग है जबकि बड़े लोगों को इससे अनुभव भी मिलता है ।
भ्रमण से जो हम सीखते हैं, उसे पुस्तकों से सीखना कठिन होता है । क्योंकि सीखने में आँख की भूमिका अन्य ज्ञानेन्द्रियों की तुलना में सबसे अधिक होती है।
ज्ञान में वृद्धि
भ्रमण हमारे किताबी ज्ञान में वृद्धि करता है । भ्रमण के सहारे इतिहास हमे वास्तविक दिखता है तथा समूचा भूगोल साकार हो उठता है । इससे अर्थशास्त्र के सिद्धान्तों की परीक्षा हो जाती है और नई चुनौतियां उभर आती हैं । समाजशास्त्र की नींव मजबूत हो जाती है । ऐतिहासिक महत्त्व के स्थानों के भ्रमण से पुस्तकों में पढ़ी धुँधली छवि प्रकाशित होकर साकार हो जाती है।
शासकीय कालिदास महाविद्यालय के प्रिंसिपल रजनीश सिंह ने कहा
विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और मस्तिष्क को तरोताजा बनाए रखने के लिए समय समय पर शैक्षिक भ्रमण जरूरी

















