संवाददाता – प्रवीण कुमार साहू
सूरजपुर ।। 11- जुलाई – 2024 ।। 1 जुलाई 2024 से देशभर में 3 नए आपराधिक कानून अमल में आ चुके है। इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, विभिन्न पहलुओं से मीडिया को अवगत कराने एवं जन-जन तक नए कानूनों की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार को लेकर कलेक्टर सूरजपुर श्री रोहित ब्यास (भा.प्र.से.) व उप पुलिस महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री एम.आर.आहिरे (भा.पु.से.) के द्वारा गुरूवार, 11 जुलाई 2024 को पत्रकारों को नए कानून के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए इस विषय पर चर्चा भी की गई।
इस दौरान कलेक्टर श्री रोहित ब्यास ने कहा कि 1 जुलाई से नवीन तीनों कानून के तहत कार्य किए जा रहे है, पुराने कानून की जगह अब नए कानून लागू हो चुका है उसकी जानकारी समस्त लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है इसमें प्रमुख रूप से मीडिया की अहम भूमिका जुड़ी हुई है, आज अधिक संख्या में लोग सोशल मीडिया, समाचार पत्रों को पढ़कर जागरूक हो रहे है इसकी गति को और तेज करने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी को इस दिशा में सहयोग करने की अपील की।
उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सूरजपुर श्री एम.आर.आहिरे ने नए कानून के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि नए कानूनों में ऐसे बहुत से प्रावधान हैं, जो पुलिस को पहले से ज्यादा ताकतवर बनाते हैं। मसलन- पुलिस अब आरोपी को 90 दिन तक हिरासत में रख सकती है, पहले ये अवधि 15 दिन थी। पुलिस का प्रमुख काम अपराध होने से पहले ही रोकना और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। बीएनएसएस के चैप्टर 13 के सेक्शन 173 में प्रावधान है कि पुलिस अधिकारी को किसी संगीन मामले की शिकायत मिलने पर प्रथम सूचना पत्र लिखने से पहले अपने सीनियर ऑफिसर से अनुमति लेकर 14 दिन की प्राथमिक जांच करनी होगी।’ यानी पुलिस अधिकारी को 14 दिन का समय मिलेगा, जिसमें वो तय करेगा कि मामले में प्रथम दृष्टया केस बनता है या नहीं। प्रत्येक दिवस पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों की जानकारी सभी थाना-चौकी व पुलिस कंट्रोल रूम के नोटिस बोर्ड में चश्पा किए जाने के बारे में बताया। उन्होंने नवीन तीनों कानून के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गो तक नए कानून की जानकारी पहुंचाने में सहयोग करें।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष महतो ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत जांच के दौरान पुलिस किसी भी आरोपी को उसके डिजिटल डिवाइस दिखाने और उन्हें सौंपने के लिए बाध्य कर सकती है। नए कानूनों में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल डिवाइस यानी मोबाइल, स्मार्टफोन, लैपटॉप आदि को सबूत के तौर पर परिभाषित किया गया है। बीएनएसएस के सेक्शन 94 के मुताबिक, किसी मामले की जांच, पूछताछ या ट्रायल के दौरान अदालत या थाना प्रभारी किसी व्यक्ति से डॉक्यूमेंट्स, कम्युनिकेशन डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या डिजिटल डिवाइस पेश करने के लिए समन या आदेश जारी कर सकता है।

एसडीओपी सूरजपुर नंदिनी ठाकुर ने नए कानून के तहत जांच करने की शक्ति के बारे में बताया और कहा कि पुलिस को किसी मामले की जांच करने का अधिकार प्राप्त है। पुलिस मामले से जुड़े सबूतों, बयानों और वस्तुओं को भी इकट्ठा कर सकती है। साथ ही न्यायालय पुलिस को मामले की जांच करने के लिए आदेशित कर सकती हैं। बीएनएसएस में इसका जिक्र चैप्टर 13 के सेक्शन 173 से लेकर 196 तक है। बीएनएसएस के सेक्शन 43(3) के तहत पुलिस अधिकारी अपराध की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय या ऐसे व्यक्ति को अदालत में पेश करते समय हथकड़ी का इस्तेमाल कर सकता है।
























