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वन्य जीव तेंदुए की खाल तस्करी पर बड़ी कार्रवाई ,तस्करी करते वाइल्ड लाइफ की टीम ने एक आरोपी को पकड़ा

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सूरजपुर जिले के दुरांचल क्षेत्र चांदनी बिहारपुर के ग्राम पासल से वाइल्डलाइफ की टीम ने तेंदुए की खाल सहित आरोपी युवक को किया गया गिरफ्तार।

सूरजपुर वन मंडल में बड़ी लापरवाही: तेंदुए की खाल की तस्करी से वन विभाग की कार्यशैली पर उठ रहा सवाल ।

सूरजपुर। वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सूरजपुर वन मंडल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वन्य जीव तेंदुए की खाल की तस्करी की घटना से यह घटना वन विभाग की लचर व्यवस्था और वन्यजीव संरक्षण में नाकामी को उजागर करती है। ऐसी घटनाओं से विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्य जीवो को संरक्षित करने विभाग भले ही बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही लगातार जिले में वन्य जीव की मौतै, वन्य जीवो की खाल की तस्करी , जिले में आम सा हो गया है , मानो ऐसा लग रहा की विभाग सिर्फ मुख दर्शक बन सिर्फ तमाशा देख रहा हो , विभाग लाखों नहीं करोड़ों रुपए वन्य जीव को संरक्षण करने के लिए खर्च कर रही लेकिन जमीनी हकीकत में जीरो देखने को मिल रहा स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश ,जंगल में ‘जंगलराज’ की कहावत एक बार फिर से सार्थक सिद्ध होते हुए सटीक बैठ रहा।

मुखबिर की सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ की टीम और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए के खाल को अपने कब्जे में लेकर आरोपी सहित खाल को जिला मुख्यालय लाया गया तथा आरोपी युवक को वन्य जीव अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए जेल दाखिल कर दिया गया, लेकिन विभाग की ओर से इस मामले में विभाग की ठोस जवाबदेही और नाकामी जो साफ साफ झलक रही।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सूरजपुर वन मंडल क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष और वाहनों की चपेट वन्य जीवों की तस्करी व जानवरों की मौत का सिलसिला आम सा हो गया और लगातार बढ़ता जा रहा है।कुछ समय में वन्यजीवों की मौत की खबरें ज्यादा सामने आई हैं। इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हालांकि, विभाग की ओर से हर बार की तरह इस बार भी बहानों का सहारा लेने की संभावना है।

विभाग की निष्क्रियता और लापरवाही देख लोग कह रहे जंगल राज आ गया है,

सूरजपुर वन मंडल में मानव और वन्यजीवों की जान खतरे में डालने वाली घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। कुछ दिन पहले ही भालू के हमले में एक महिला की मौत ने भी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। अब वन्य जीव की खाल की तस्करी ने एक बार फिर वन विभाग की नाकामी को उजागर किया है। सवाल यह है कि आखिर कब तक बहानों की बैसाखी पर चलता रहेगा वन विभाग? और कब तक वन्यजीवों की जान यूँ ही खतरे में पड़ती रहेगी

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