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गंगा दशहरा के अवसर पर दुलही तालाब में माँ गंगा पूजन व महाआरती कल

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निरज साहू ….

आयोजन को लेकर की गई है व्यापक तैयारियां

सूरजपुर। मोक्षदायिनी मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस गंगा दशहरा के पावन पर्व पर आज गुरुवार को पँचमन्दिर स्थित दुलही तालाब में विगत वर्षों की भाति इस वर्ष भी भजन संध्या, माँ गंगा पूजन व महाआरती का आयोजन किया गया है। आयोजन को लेकर तालाब परिसर की साफ-सफाई के साथ व्यापक तैयारियां की गई हैं। इधर शहर के बड़खापारा मोहल्ले में स्थित छठ तालाब में भी साफ सफाई व रंग रौग़न कर परंपरा के अनुरूप गंगा दशहरा का पर्व भव्यता के साथ मनाये जाने की तौयारी की गई है। यहां ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर अपनी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते है। ग्रामीण क्षेत्र के महिला, पुरुषों के दशहरा पर्व पर गाए जाने वाले परंपरागत गीतों से तालाब परिसर गुंजायमान रहता है। नगर के दुलही तालाब में विगत 4 वर्षों से सरोवर धरोहर सुरक्षा समिति के द्वारा नगर पालिका एवं जनसहयोग से यह भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में शहर सहित आसपास क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर गंगा पूजन आरती में शामिल होते हैं। मान्यता है कि भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान महादेव की जटाओं में विराजी मां गंगा इसी दिन पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं और भगीरथ के पूर्वजों को मोक्ष प्रदान किया था। तभी से इस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। आज 5 जून गुरुवार को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन 5 बजे से दुलही तालाब परिसर में भजन संध्या का आयोजन होगा। ततपश्चात सायं 7 बजे मां गंगा पूजन व महाआरती होगी। पंडित राजेश दुबे बबलू महाराज व उनकी टीम द्वारा संगीतयमय वातावरण में धार्मिक मंत्रोच्चारण के बीच गंगा पूजन व महाआरती का कार्यक्रम सम्पन्न कराया जाएगा। आयोजन के लिए दुलही तालाब के तट को नाम के अनुरूप रंगबिरंगी रोशनी से दुल्हन की तरह सजाया गया है। जहाँ आज धार्मिक वातावरण जे बीच गंगा आरती का भव्य आयोजन होगा।

आँटे के दीयों से जगमगाएगा दुलही तालाब का तट

आयोजन के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखते हुए विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी तालाब परिसर में आटे से निर्मित दीये जलाने का निर्णय लिया गया है। धार्मिकता के साथ दुलही तालाब रंग-बिरंगी मछलियों के लिए भी जाना जाता है। यहां बड़े पैमाने पर मछलियां हैं जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मछलियों को दाना देकर अपनी धार्मिक परंपरा का निर्वहन भी करते हैं। तालाब परिसर की स्वच्छता व मछलियों को ध्यान में रखते हुए तालाब परिसर में आटे का दीया जलाने का निर्णय आयोजन समिति द्वारा लिया गया है। ताकि आयोजन के बाद दीयों का उपयोग मछलियों के भोजन के रूप में हो सके और परिसर भी स्वच्छ रहे। इसके लिए सभी से अपील की गई है कि आयोजन के दौरान प्रज्वलित किये जाने वाले दीयों को घर पर आटे से निर्मित करके ही लाएं।

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